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वो जिस आग को बुझाने के लिए रो रही थी, बाबा तो उसे ही हवा देने निकले हैं...
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यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।
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आंखों देखी! पंचायत चुनाव के पहले की एक रात।
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हमीं चुनते हैं नेता! हमें तो यकीन नहीं, क्या आपको है?
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लो आ गए राहुल भैया, नाचो ता थईया ता थईया ता थईया...
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... आखिरकार शराब पी, रुपये ले और मुर्गा खा ही हुई वोटिंग
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नगर निकाय चुनाव : होगी बस जाति, पैसे व शराब की बात
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