यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।
कल एक बलात्कारी सिर्फ इसलिए छूटने जा रहा है क्योंकि वह जुर्म के समय किशोर था? अरे भाई, वह किशोर था, अबोध तो नहीं था..? वह यदि मजे ले सकता था.. तो लड़की के दर्द को भी महसूस कर सकता था न? उसी की उम्र में इंजीनियरिंग के या बिजनेसमैन लड़के लाखों के पैकेज पर काम कर रहे हैं...I उनकी कंपनियां तो उन्हें अबोध नहीं मानती..? वे उन कंपनियों के लिए, अपने और परिवार के लिए भी अच्छा काम कर रहे हैं...I अरे..वे सबकुछ समझते हैं..और केवल वही नहीं, इस उम्र का हर लड़का, लड़की सही, गलत की जानकारी और समझ रखते हैंI...उस बलात्कारी ने भी तो कभी अपनी बहन या वैसी ही किसी और लड़की को नहीं छेड़ा...? क्योंकि उसे तब पता था कि बहन कौन है...बहन का रिश्ता क्या होता है... उसे सबकुछ पता था तो फिर वह अपने जुर्म से भी अनजान कहां था...?
इस मामले में हम कोर्ट के निर्णय पर सवाल नहीं उठा रहे क्योंकि कोर्ट को कोई भी फैसला बने-बनाए कानून के दायरे में ही करना है...लेकिन, हमें अपने देश के इन नेताओं की नीयत पर शक है जो किशोरवय अपराधियों की सजा वाले प्रस्ताव, कानून पारित नहीं कर रहेI ...दिल्ली की विधान सभा को पता है कि विधायकों के वेतन कितने होने चाहिए, दिल्ली की संसद को पता है कि सांसदों को कितने तरह के भत्ते और अधिकार दिए जाने चाहिए...तो क्या इन्हें ये नहीं पता कि अपराधियों के साथ कैसा सलूक किया जाना चाहिए...? एक लड़की को भी जीने का अधिकार मिलना चाहिए..? इन्हें एक अपराधी की उम्र दिखती है, देश में लड़कियों की मरी और जिंदा लाशें नजर नहीं आती...? सच कहें तो हमें वह बलात्कारी और ये नेता एक जैसे ही नजर आ रहे हैं... क्योंकि दोनों को ही अपने मजे का ख्याल है लेकिन किसी के दर्द का अहसास नहीं...I
और हां,माफ करना, जो कह दिए, उस पर हम किसी से माफी नहीं मांगने वालेI

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