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पब्लिक के बीच के इन पॉलिटिशियन से जरा बच के...।

वो जिस आग को बुझाने के लिए रो रही थी, बाबा तो उसे ही हवा देने निकले हैं...

मां के लिए एक ही दिन क्यों...?

इतना भी 'सोशल' न हो जाइए कि अपना कुछ रहे ही नहीं

हर पुल कमजोर ही बनेगा, जब तक आरक्षण का पुल मजबूत है

इ पब्लिक का नेता जी को बधाई!

हम भी भक्त है, हाँ, तुम बड़े वाले हो!

यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।

नेता से अच्छा बेटा

बोल तो दिया है लेकिन एक बार सोच लो!

यह चुनावी सवाल हैं जनाब!

... अपना के दारा सिंह बुझ$ताड़$ ... ?

भारतीय गणतंत्र दिवस : बहुत दिन नहीं हुए, कितना बदल गए हैं हम...।

रामदेव का राजनीतिक योग या निगमानंद का त्‍याग?

मां के लिए एक ही दिन क्‍यों ?

आह! ये दलित और नारी उत्‍थान...???

दहशत कम कि बढ़ाते हैं ऐसे बयान?

इसीलिए तो मुंह काला है झूठ का...

सलमान जी! बातें तो खूब रहीं आपकी, अब कुछ काम भी कीजिए