सलमान जी! बातें तो खूब रहीं आपकी, अब कुछ काम भी कीजिए

सलमान जी, इस सप्‍ताह आपके टि़वटर की खूब चर्चा रही। आपने जो अतुल्‍य भारत पर कमेंट किया था, वह दिल को छू गया। क्‍या लाइनें थीं आपकी- एम्‍बुलेंस पहुंचने से पहले पिज्‍जा पहुंच जाता है, सिम फ्री में मिलता है और चावल 40 रुपये किलो... वगैरह-वगैरह। पर्दे पर तो आपको अदाकारी करते बहुत देखा था पहली बार आपके शब्‍दों की कलाकारी देखी। एकबारगी यकीन नहीं आया, लेकिन दूसरे ही दिन जब अखबारों में आपकी लाइनें प्रकाशित हुईं तो यकीन करना ही पड़ा। लेकिन यह हमारी समझ में अब तक नहीं आ सका कि क्‍या फर्क है हमारे देश के नेताओं और देश के अभिनेताओं में? आपने भी तो वहीं किया जो हमारे देश के नेता करते रहे हैं। आपने भी उन्‍हीं लाइनों को भुना लिया जो लाइनें सदा से चुनाव में भुनायी जाती रही हैं। आपके इस कमेंट से गरीबों का क्‍या भला हुआ, नहीं पता लेकिन आप तो मुफ़त में ही समाचार पत्रों में पूरे दिन छाये रहे। खैर, आपके सवाल यदि हमारी देश के नेताओं की समझ में आ जाए, तो क्‍या कहने? लेकिन कुछ सवाल हमारे भी हैं, आपके लिए। क्‍या आप बताएंगे कि जिन-जिन उत्‍पादों का आप प्रचार-प्रसार करते हैं, उनके बारे में जो लंबी-चौड़ी तारीफें करते हैं, उससे खुद आप पूरी तरह संतुष्‍ट होते हैं? पहले खुद सुधरिए फिर भारत को सुधरने की नसीहत दीजिएगा। क्‍या कभी आपने लोगों को एम्‍बुलेंस के लिए रास्‍ता छोड़ने के लिए प्रोत्‍साहित करने का प्रयास किया है? फिर इस सवाल को पूछने का अधिकार ही कहां है कि एम्‍बुलेंस पहुंचने से पहले पिज्‍जा पहुंच जाता है। यदि आप कभी जन-सरोकार से जुड़ी चीजों के लिए लोगों को प्रोत्‍साहित करते दिखे भी हैं, तो एक व्‍यवसायी के तौर पर न कि एक नागरिक और समाजसेवी के रूप में। क्‍या अपने अब तक कोई ऐसी फिल्‍म की है जो आम लोगों की समस्‍याओं से जुड़ी हो? यदि ऐसी फिल्‍में आपने की है, तो आप बता सकेंगे कि उसके लिए कितने रुपये लिए? जिनको आप शब्‍दों के माध्‍यम से भरमा रहे हैं, उनकी खातिर आपके संदेश कहां हैं? जनाब टिवर पर मुफत के शब्‍द चिपकाने से एम्‍बुलेंस पिज्‍जा से पहले नहीं पहुंचने लगेंगे, और इसके लिए केवल भारत सरकार ही दोषी नहीं है। भारत के बारे में कटाक्ष करने से पहले आपको यह तो सोचना ही चाहिए था कि इसके लिए आपने कितनी कोशिश की? जहां तक हमने देखा है कि बड़े-बड़े पोस्‍टरों के माध्‍यम से आप विभिन्‍न उत्‍पादों के प्रचार करते ही दिखे हैं, कभी किसी चौराहे पर लगे बड़े पोस्‍टर में सलमान यह कहते कभी नजर नहीं आते कि एम्‍बुलेंस जा रहा है, किसी के जीवन का सवाल है, प्‍लीज रास्‍ता दे दीजिए। आप ऐसा करेंगे भी क्‍यों? आप भी तो उसी भारत के तथाकथित नागरिक हैं, जिस भारत की तस्‍वीर आपने दिखायी है। जनाब, कटाक्ष करने से पहले यह अवश्‍य सोच लीजिए कि देश में रहने वाला हर देशवासी अपने भारत के बारे में ऐसी ओछी बातें नहीं सुन सकता। और हां, पिज्‍जा की डिमांड करने वाले भी आप जैसे बड़े लोग ही हैं, हम जैसे ही सामान्‍य लोग हैं जिनके घर एम्‍बुलेंस पहुंचने में दिक्‍कत हो जाती है और वह भी इसलिए क्‍योंकि उस एम्‍बुलेंस को ओवरटेक करके आपकी पिज्‍जा गाड़ी निकल जाती है या फिर उसे साइड ही नहीं देती। हमारा मतलब सिर्फ आपसे नहीं बल्कि सभी उच्‍च वर्गीय लोगों से है। हां, आपकी शिकायत अवश्‍य ठीक है लेकिन तब जब आप इसके लिए धरातलीय प्रयास करें और सरकार आपका साथ न दे। नाचते-गाते सरकार पर आरोप लगाना और अपने ही देश को नीचा दिखाने से आप हीरो नहीं बन जाएंगे। लेकिन यदि आपने सचमुच अपने ही सवालों का जवाब बनने का प्रयास किया तो फिर पर्दे से निकलकर आप देश के आम लोगों के नायक साबित होंगे, और फिर आज आपकी बात का बुरा मानने वाले हम जैसे लाखों लोग भी कहेंगे- वाह सलमान जी, आपने बता दिया कि आप वाकई हीरो हैं।

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