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वो जिस आग को बुझाने के लिए रो रही थी, बाबा तो उसे ही हवा देने निकले हैं...

हर पुल कमजोर ही बनेगा, जब तक आरक्षण का पुल मजबूत है

कौन नारंग? वो तो हिन्दू था न?

इ पब्लिक का नेता जी को बधाई!

धत... तुम इसे प्यार कहते हो!

यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।

बोल तो दिया है लेकिन एक बार सोच लो!

आयोग बताए, ऐसे में कैसे मुमकिन है निष्पक्ष चुनाव?

हमीं चुनते हैं नेता! हमें तो यकीन नहीं, क्या आपको है?

लो आ गए राहुल भैया, नाचो ता थईया ता थईया ता थईया...

आजकल होमगडवे सीओ बाड़न...

'जैसा दाम, वैसा काम' शिक्षकों के साथ क्यों नहीं?

हैरान न हों, यह रोग पुराना है

सत्ता चली गांव की ओर...???

आप की जीत और उसके चर्चें

दिल्ली चुनाव परिणाम के बहाने

अयोध्‍या के बहाने...