आप की जीत और उसके चर्चें

अरविंद केजरीवाल की जीत ऐतिहासिक है, अब इसके चर्चें भी रिकार्ड तोड़ रहे हैं। सभी भाजपा-आप की हार-जीत की व्याख्या अपने तरीके से करने में लगे हैं। इसमें एक चाय पीने वाले से चाय बनाने वाले, पढ़ने वाले से पढ़ाने वाले तक सब शामिल हैं। हर व्यक्ति इस समय राजनीति का सबसे बड़ा ज्ञाता जान पड़ता है।
हमारी समझ में केजरीवाल की जीत में जितनी भूमिका उनकी खुद की है, उतनी ही दिल्ली की जनता की भी है। केजरी के साथ खड़े एक-दो लोग जो दु:ख की घड़ी में भी उनके साथ रहे, उनका परिवार, उनके कार्यकर्ता और समर्थक सभी इस जीत के हिस्सेदार हैं। इन सबके अलावा वर्तमान स्थितियां भी उनकी जीत में कहीं न कहीं सहायक साबित हुई हैं। कांग्रेस का बोरियत भरा शासन, भाजपा का लम्बा-उबाऊ भाषण अधिकतर लोगों को एक जैसा लगने लगा था। एक नई व्यवस्था, नये व्यक्तित्व को तलाशती दिल्ली को केजरीवाल भा गए और उनकी जीत हुई।
इस जीत को ऐतिहासिक बनाने में भाजपा की भूमिका कम नहीं। केजरीवाल जीते इसलिए क्योंकि वे जनता को भा गए, लेकिन उनकी जीत ऐतिहासिक इसलिए बनी क्योंकि उनके सामने भाजपा जैसी पार्टी का चेहरा खड़ा था। और यह जीत इसलिए भी और चर्चा में है क्योंकि कोई यह नहीं कहता कि केजरी ने किरण को हराया, सभी यह मान बैठे हैं कि केजरी ने मोदी को शिकस्त दी है। मोदी जैसे व्यक्तित्व की हार बड़ी बात है और इसलिए जीत ऐतिहासिक है। हर दल के रणनीतिकारों ने अलग-अलग रणनीति बनाई, अलग-अलग चालें चलीं लेकिन दिल्ली के हर क्षेत्र के वोटरों ने एक-सा सोचा और इसलिए भी यह जीत ऐतिहासिक बन गई।
जहां तक मोदी या भाजपा की हार की बात है तो भाजपा को उसके वोट दिल्ली ने दिए हैं। मात्र दो फीसदी मत की गिरावट दर्ज की गई जो कहती है कि भाजपा की हार में सिर्फ दिल्ली जिम्मेदार नहीं है, उसकी अपनी चुनावी रणनीति, रीति-नीति और कई निर्णय ज्यादा बड़े कारण हैं। दिल्ली ने जो मत दिए हैं, वह कहते हैं कि दिल्ली ने भाजपा को हराया नहीं है उसने उसे सबक सिखाया है- चेताया है और केजरी को चुना है। यह सब यह हमें, कम से कम हमको, यह कहने से रोकता है कि मोदी का मैजिक पूरी तरह समाप्त हो गया है या दिल्ली में भाजपा खत्म हो गई है।
दिल्ली पांच सालों के लिए आप की है लेकिन यदि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई तो शासन के बाद का चुनाव उसकी परीक्षा का परिणाम होगा। देश में भाजपा की सरकार है, कई राज्यों में वह शासन कर रही है- ऐसे में उसके कार्यों की सराहना- आलोचना वोटर आसानी से करने में सक्षम थे। अब तक केजरी ने सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य किया है, ानता ने नेता के रूप में उनका कार्य नहीं देखा है। अब उनके नेतृत्व की असल परीक्षा होगी। जनता के पास उनके किए कार्यों के आधार पर उनकी क्षमता जानने की सहूलियत होगी और इसलिए यह पांच साल आप की परीक्षा के साल होंगे।

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट