हर पुल कमजोर ही बनेगा, जब तक आरक्षण का पुल मजबूत है
देश में #इंजीनियर चाहें पुल जैसा बनाएं, नेताओं ने इंजीनियरिंग से लेकर हर क्षेत्र में#आरक्षण का पुल इतना मजबूत कर दिया है कि उसे कोई ढाह नहीं पाएगा। हाँ, लेकिन जब#पुल गिरता है तो उसके नीचे दबने वाला आरक्षण वाला भी हो सकता है और इस वर्ग से बाहर का भी। इसलिए तो वे कह रहे हैं कि पुल का गिरना भगवान की मर्जी थी। (वरना ये भी इनकी मर्जी से होता तो शायद खास वर्ग के लोग ही जान से जाते।) यह भी हो सकता है कि वह पुल आरक्षण से बने इंजीनियर ने न बनाया हो लेकिन जिसने भी बनाया, वह इसके#योग्य नहीं है। और आरक्षण तो अयोग्य को ही इंजीनियर बनाता है।)
आरक्षण देते हैं ताकि किसी दबे कुचले को ऊपर उठाएं लेकिन #अयोग्य को पद देने से उसकी गलतियों के कारण कितने लोग नीचे दबते हैं, ये इन्हें नजर नहीं आता। एक को आरक्षण से इंजीनियर बनाकर उसे नीचे से ऊपर उठाया लेकिन उसने कितनों को ऊपर उठा दिया, इसका जवाब कौन देगा? आरक्षण से #डॉक्टर बनाकर किसी को नीचे से ऊपर किया लेकिन उसने कितनों को ऊपर पहुंचा दिया, इसका हिसाब कौन रखेगा?
आरक्षण जरूर मिले लेकिन जो जिस पद की #योग्यता रखता है, उसे पद भी वही मिले। किसी खास वर्ग के लिए किसी खास पद पर जितना प्रतिशत आरक्षण चाहते हो, जरूर दो लेकिन उस#खास_वर्ग के लिए योग्यता तो वही रहना चाहिए। वरना एक नीचे के आदमी को उठाकर डीएम बनाओगे, वो पूरेे जिले को नीचे गिरा देगा। उसे कौन उठाएगा?
आरक्षण आर्थिक आधार पर हो, आरक्षण जाति को नहीं, गरीब को मिले। आरक्षण से#नौकरी मिले, न कि आरक्षण से कोई #डीएम, डॉक्टर, इंजीनियर बने। उसे पद मिले, मगर वही मिले, जिसके वह लायक है। जब #शिक्षा के समय से ही आरक्षण है तो आप गढ़िए या वो खुद गढ़े, खुद को उस पद के योग्य, जो आप उसे बनाना चाहते हैं या जो वो बनना चाहता है। उसकी कमजोरियों को आरक्षण देकर उसे #मजबूत जरूर बनाएं लेकिन उसकी नाकामियों को आरक्षण देकर सबको #मजबूर न करें।
हम आरक्षण विरोधी नहीं लेकिन, हैं भी। हमें जाति आधारित नहीं, #आर्थिक आधार पर आरक्षण मंजूर है। हम कमजोर के आरक्षण के पक्षधर हैं लेकिन किसी अयोग्य के नहीं। आरक्षण के नियमों की #समीक्षा देश हित में है और ये होना चाहिए। कुछ खास लोगों को ऊपर उठाने के लिए और कितनों को ऊपर पहुँचाओगे? कुछ खास लोगों को नीचे से ऊपर उठाने के लिए कितनों को ऊपर से नीचे गिराओगे? कल ये ऊपर होंगे और वो नीचे। तब उन्हें आरक्षण की जरुरत पड़ेगी और यह खेल चलता ही रहेगा। आरक्षण की एक तय #अवधिहोनी चाहिए, ताकि उस अवधि के बाद सब #बराबर हों और उन्हें बराबर अधिकार मिलें। वे जो हों अपने बलबूते हों। इंजीनियर बनें तो खुद के बूते, न कि खैरात सेे।

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