तिरंगे की शान में केन्‍द्र की गुस्‍ताखी

क्‍या आपको पता है कि लालकिले पर पहली बार राष्‍ट्रध्‍वज कब फहराया गया? निश्चित ही आपको मालूम होगा, आपने अपने शैक्षणिक शुरूआत में ही इसका अध्‍ययन अवश्‍य किया होगा। कक्षा 3 से लेकर 5 तक की किताबों में इसका उल्‍लेख है। लेकिन, क्‍या आप यह भी जानते हैं कि केन्‍द्र को इस बारे में न तो कोई जानकारी है और न ही इस संबंध में उसके पास कोई साक्ष्‍य ही मौजूद है? आश्‍चर्य की भी बात है और काफी शर्मनाक भी, लेकिन सत्‍य यही है। आरटीआई के तहत बिहार के छपरा स्थित एक मध्‍य विद्यालय के शिक्षक को मिली सूचना तो यही बताती है। एक बार आप भी पूरे मामले से अवगत हो लीजिए, फिर आपको भी पूर्व में पढ़ी किताबी जानकारी पर संशय उत्‍पन्‍न हो जाएगा। जहां केन्‍द्र की पुस्‍तकें कहती हैं कि 15 अगस्‍त को पहली पर तिरंगा फहराया गया वहीं केन्‍द्र सरकार से जब सूचना मांगी जाती है तो वह इस संबंध में कोई साक्ष्‍य उपलब्‍ध नहीं होने की बात करता है। फिर किस आधार पर पुस्‍तकों में तिरंगा फहराने की इस तिथि की घोषणा कर दी गयी? क्‍या यह तिथि एक काल्‍पनिक तिथि है? क्‍या तिरंगा इसके पहले भी कहीं फहराया गया था? और यदि हां, तो कब, कहां, किसने फहराया? तमाम सवाल जेहन में आते-जाते हैं। इन सवालों को जन्‍म केन्‍द्र की एक भ्रामक सूचना ने दी है, तो निराकरण भी उसे ही करना होगा।
पूरा मामला यह है कि बिहार के छपरा जिला मुख्‍यालय के नबीगंज मुहल्‍ला स्थित बापू कन्‍या मध्‍य विद्यालय के सहायक शिक्षक नित्‍यानंद मिश्र बच्‍चों को बीटीसी की पुस्‍तकें पढ़ा रहे थे। इसमें 15 अगस्‍त को पहली बार तिरंगा फहराने की बात कही गयी थी। उन्‍हें अपनी तमाम जानकारियों के कारण एकबारगी इस बात पर पूर्ण विश्‍वास नहीं हो सका। इसके लिए उन्‍होंने अन्‍य कई पुस्‍तकें भी पढ़ी लेकिन संतोष नहीं हो सका। फिर, आखिरी रास्‍ते के रूप में आरटीआई के तहत सांस्‍कृतिक मंत्रालय से जवाब मांगा। सांस्‍कृतिक मंत्रालय ने पत्र संख्‍या 27-17/2010 के माध्‍यम से 29 अप्रैल 2010 को अपना जवाब श्री मिश्र को भेजा। लेकिन पत्र में जवाब की बजाय सलाह दी गयी थी। मंत्रालय ने बताया कि यह मामला केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय से संबंधित है और इसकी जानकारी वही दे सकता है। इसके बाद श्री मिश्र ने यही सवाल केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय से किया। केन्‍द्र ने पत्र संख्‍या 24/79/2010 के जरिए जून 2010 में जवाब प्रस्‍तुत किया। केन्‍द्र से मिले जवाब से शिक्षक को बड़ा झटका लगा। दरअसल, केन्‍द्र ने अपने जवाब में सीधे तौर पर लिखा था कि मंत्रालय में उपलब्‍ध अभिलेखों के अनुसार इस संबंध में कोई निविर्दिष्‍ट सूचना उपलब्‍ध नहीं है। पत्र के सबसे नीचे केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय के उपसचिव व सह केन्‍द्रीय सूचना अधिकारी एसके भटनागर का हस्‍ताक्षर था। यानी, यह जवाब केन्‍द्रीय सूचना अधिकारी की तरफ से दी गयी थी। केन्‍द्र द्वारा अपने जवाब में कही गयी यह एक लाईन कई सवालों को जन्‍म देती हैं, वहीं केन्‍द्र को भी कठघरे में खड़ा करती है। क्‍या सचमुच मंत्रालय को नहीं पता कि तिरंगा पहली बार कब फहरा, और यदि नहीं पता तो फिर किताबों में लिखकर बच्‍चों को गलत जानकारी क्‍यों दी जा रही है? केन्‍द्र को इस सवाल का जवाब देना ही होगा।

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