दहशत कम कि बढ़ाते हैं ऐसे बयान?

बिहार के सारण जिला में प्रथम चरण का पंचायत चुनाव आज यानी बुधवार को शांतिपूर्वक संपन्‍न हो गया। बूथों तक जुटी मतदाताओं की भीड़ को देखते हुए यह तो सही ही है कि मतदाता दहशत में नहीं थे लेकिन इसके पूर्व अधिकारियों के आये बयानों पर एक बार चर्चा आवश्‍यक है। स्‍थानीय जिलाधिकारी विनय कुमार ने चुनाव पूर्व दहशतगर्दों को डराने के लिए कहा था कि जिस जीप से बैलेट बॉक्‍स बूथों से आएंगे, उसी जीप पर ऐसे दहशतगर्दों की लाशें भी आएंगी। लेकिन, ऐसा कहते हुए एक बार भी नहीं सोचा कि इससे वे भय को कम करने के बजाय कहीं बढा ही रहे हैं। अब तो चुनावों के दौरान जिम्‍मेदार अधिकारियों के ये बयान आम हो चले हैं। दहशतगर्दों को केन्‍द्र में रख ऐसे बयान जारी करते समय अधिकारियों को सोचना चाहिए कि यह बयान सिर्फ उन तक नहीं पहुंचते, बल्कि अखबारों के माध्‍यम से यह आम मतदाताओं तक भी पहुंचता है। यह उनमें सुरक्षात्‍मक भाव से अधिक भय का भाव उत्‍पन्‍न करता है। आज सुबह-सुबह प्राय: हर गांव में यह चर्चा थी कि देखते ही गोली मारने का आदेश्‍ा है। कुछ अनपढ़ महिलाएं, बूढ़े अपने बच्‍चों को कह रहे थे कि ऐसे माहौल में बूथों पर जाना ठीक नहीं। ऐसे दृश्‍य अधिकारियों के इन बयानों पर सोचने को विवश करते हैं। 

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