हर...हर मोदी! धन्य है यह देश भक्ति!


15 लाख हमने कभी नहीं मांगा लेकिन 1500 जाने का अब मलाल है जब यह स्पष्ट हो चुका है कि नोटबन्दी 'तुगलक टाइप' एक सोच थी, हिटलर टाइप एक फैसला था और इसके परिणाम जीरो से भी पहले के हैं, माइनस में। मेरे पास पुराने 500 के तीन नोट अब भी पड़े हैं जिन्हें हम तीनों भाइयों ने अपनी बहन को बहुत पहले रक्षाबंधन पर दिया था। बहन इन नोटों को याद के रुप में संजोने की चाह में ऐसी जगह रख दी कि फिर ये नोट उसे भी नहीं मिले। नोटबंदी के बाद जब घर की सफाई हो रही थी तब यह नोट मिले जो अब सिर्फ याद बनकर ही रह जाएंगे। सरकार की मानें तो यही कालाधन है जो बैंक में वापस नहीं जा सका। अभी तक इस बात का संतोष था कि देशहित में यदि मेरी कमाई के 1500 रुपए शहीद भी हो गए तो कोई बात नहीं, कितने लोग तो खुद ही शहीद हो गए, जिनकी कुर्बानी के आगे यह तुच्छ है। लेकिन, आज जबकि नोटबंदी का फैसला लागू होने के इतने दिनों बाद रिजर्व बैंक ने बैंक में वापस हुए सारे नोट गिन लिए हैं तो आंकड़े देखकर मेरे होश उड़े हुए हैं। समझ नहीं आ रहा कि आखिर नोटबन्दी का फैसला लिया क्यों गया!

          रिजर्व बैंक के अनुसार, सिर्फ .1 परसेंट नोट ही ऐसे हैं जो बैंक में वापस नहीं आ पाए। (हालांकि इनमें भी सभी को कालाधन नहीं कह सकते जिसमें कि 1500 रुपए मेरे भी शामिल हैं।) 99.9 परसेंट नोट वापस बैंक में आ गए हैं। रुपयों में बात करें तो 15.44 लाख करोड़ रुपयों में 15.28 करोड़ रुपए वापस हो गए हैं। 1000 के जो नोट कालाधन के लिए सबसे अधिक कुख्यात करार दिए गए, उनमें सिर्फ 8.9 करोड़ रुपए ही वापस नहीं हुए। यदि सरकार के नजरिए से मान भी लें कि जो रुपए बैंक में वापस नहीं आ सके, वह सभी कालाधन हैं, मेरे 1500 रुपए भी तो भी यह राशि इतनी कम है कि इससे कई गुनी तो नए नोट छापने पर सरकार ने खर्च कर दिए। नोटबन्दी के प्रचार प्रसार और अन्य मद में जो करोड़ों खर्च हुए वह अलग।

        मोदी जी, खाते में जो 15 लाख आने वाले थे उसकी बात हमने आजतक नहीं की क्योंकि मुफ्तखोरी की आदत नहीं हमें लेकिन सरकार के खजाने में भी तो वह राशि नहीं पहुंची? फिर सारा कालाधन गया कहां? जिस भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए नोटबंदी को आपने अचूक हथियार के रूप में प्रचारित किया, उसके परिणाम यह हैं? भ्रष्टाचार के वे रुपए कहाँ हैं जिसके लिए आपने नोटबन्दी जैसा निर्णय लेकर देश को अघोषित आपातकाल (अव्यवस्था के लिहाज से) के हालात में पहुंचा दिया? आखिर आपको किसने बता दिया था कि देश में कितना कालाधन है? किसने राय दी थी कि नोटबंदी के जरिए सारा कालाधन वापस आ जाएगा? या यह फितूर खुद आपके दिमाग की उपज थी? या आपको कोई सपना आया था? इस नोटबन्दी के पीछे कुछ और वजह तो नहीं? क्योंकि जो वजह बताई गई वह तो साबित नहीं हुई। कहीं कोई साजिश तो नहीं? लेकिन हो भी तो इसकी जांच कौन करेगा? क्या इसकी जांच भी सीबीआई से कराएंगे? नोटबंदी के लिए लोगों ने महीनों तक अव्यवस्था झेली, इस उम्मीद ​में कि भ्रष्टाचार का सफाया हो जाएगा, उनकी उम्मीदों के टूटने की जिम्मेदारी कौन लेगा? कई की जानें गईं, उनका क्या? उनके परिवारों का क्या? नोटबन्दी क्यों? क्यों?

         पीएम साहब, इस तरह के सवाल बहुत हैं। उम्मीद है इस बार मन की बात जब आप करेंगे तब उसमें इन सारे सवालों के जवाब होंगे। प्रधानसेवक जी, अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा तो सब पीटते हैं, अपनी इस नाकामी की जिम्मेदारी लेने का साहस कीजिए तो जानें।

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