 |
| Lalu Prasad |
बिहार की लोस सीटों में सबसे चर्चित सीट छपरा, सीवान से ही हैं लेकिन फिलवक्त अभी सबसे अधिक चर्चा में है महाराजगंज व छपरा लोकसभा सीट। मो. षहाबुद्दीन की राजनीतिक निश्क्रियता के बाद सीवान लोस सीट पर अब उतनी चर्चा नहीं हो पाती लेकिन कद्दावर व दबंग नेता प्रभुनाथ सिंह के चलते महाराजगंज व बिहार की सियासत को अपने इषारे पर घुमाने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के कारण छपरा लोस सीट अब भी ख्याति की मोहताज नहीं रही है। ये दोनों ही सीटे ऐसी हैं, जहां राजद को छोड़ अभी किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों के नाम नहीं खोले हैं। पत्ते तो राजद ने भी नहीं खोले हैं लेकिन महाराजगंज में प्रभुनाथ सिंह उसके निर्विवाद उम्मीदवार के रूप में खड़े हैं तो छपरा लोस सीट पर सदा से ही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का कब्जा रहा है। हां, भाग्य के फेर, सियासी समीकरणों और न्यायालय के आदेष ने राजद को अब इस स्थिति में ला खड़ा कर दिया है कि उसे लालू का उत्तराधिकारी ढूंढना पड़ रहा है और वक्त का तकाजा देखिए, लोस चुनाव सिर पर है और राजद समझ नहीं पा रहा कि लालू का उत्तराधिकारी कौन हो। बात पुष्तैनी सम्पत्ति की नहीं है, यहां राजनीतिक उत्तराधिकारी की बात है। और उत्तराधिकारी भी किस सीट का? जो लालू की जागीर बन चुकी है, जो राजद की प्रतिश्ठा बन चुकी है, जिस पर राजद सुप्रीमो को तब भी गुमान रहा है जब राजद सत्ता में न रही हो, वह सीट जिसकी बदौलत वे केन्द्र में पहुंचे, वह सीट जो अब तक लालू ही नहीं बिहार में राजद की भी लुटिया डुबोने से बचाती आ रही है, और वह सीट जो लालू के यादव कुल से भरी पड़ी है। ऐसे में, उत्तराधिकारी के रूप में ऐसे षख्स की खोज की जा रही है जिसका नाम लेकर पूरे विष्वास के साथ कहा जा सके कि छपरा लोकसभा क्षेत्र राजद का था और राजद का ही रहेगा।
 |
| Tej Pratap |
छपरा लोकसभा क्षेत्र को यदि जातीय दृश्टिकोण से देखें तो यहां सबसे अधिक संख्या यादवों की है। इसके बाद बारी आती है राजपूतों की और तीसरे नंबर पर अन्य जातियाॅं हैं। ऐसे में, यह तो तय है कि जातीय समीकरण के आधार पर जीत दर्ज करने के लिए छपरा लोकसभा सीट का उम्मीदवार कोई राजपूत या यादव ही हो। चूंकि छपरा के यादव हमेषा से ही लालू प्रसाद को कुल देवता सदृष समझते रहे हैं और उनसे अलग नहीं जा सकते, लिहाजा इस बार राजद को राजपूत वोटरों की अधिक चिंता है। यह इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि भाजपा की ओर से छपरा लोस सीट पर उम्मीदवारी करने वाले राजीव प्रताप रूड़ी राजपूत बिरादरी से ही आते हैं। यह अलग बात है कि भाजपा ने अभी तक उनके नाम की घोशणा नहीं की है लेकिन परम्परा के मुताबिक यह सीट उन्हीं के नाम माना जाएगा। इस सीट से वे एक बार लोकसभा तक पहुंच भी चुके हैं। भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी के मुकाबले राजद का प्रत्याषी भी राजपूत ही हो तो राजपूत वोटों का बिखराव हो जाएगा। चूंकि इतिहास कहता है कि यादव मत तो राजद को मिलना ही है, ऐसे में यदि राजपूत वोटों को भी राजद अपने पक्ष में करने में कामयाब हो जाता है या फिर इसे बिखेरने में सफल हो जाता है तो जीत सुनिष्चित हो सकती है। राजद की ओर से राजपूत बिरादरी के ऐसे उम्मीदवार के रूप में राजद समर्थक पहला नाम रघुवंष प्रसाद का ले रहे हैं। रघुवंष प्रसाद ऐसे षख्स हैं, जिन पर यादवों का भरोसा तो है ही, राजपूत होने के नाते वे रघुवंषी-यदुवंषी रिष्ते को मजबूत कर राजद की सियासी जमीन छपरा को उसके लिए और ऊपजाऊ बनाने व इसकी फसल काटने में कामयाब हो सकेंगे।
लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी के रूप में एक नाम उनके बेटे तेजप्रताप का है तो दूसरा नाम राबड़ी देवी का।
 |
| Raghuvansh Prasad |
छपरा में राजद समर्थकों के मुताबिक छपरा से खड़े होने वाले राजद उम्मीदवार में यहां के समर्थक लालू प्रसाद का अक्स ढूंढेंगे, इस लिहाज से तेजप्रताप मुफीद तो हैं लेकिन पिता के समान राजनीतिक अनुभव नहीं होने की कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। लिहाजा, इस सीट पर उम्मीदवारी के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी ही होंगी। छपरा के यादव परिवारों में राबड़ी देवी का नाम काफी श्रद्धा से लिया जाता है। इसे यूं भी समझा जा सकता है कि छपरा में राजद के वरिश्ठ नेता पूर्व मंत्री उदित राय के बरामदे में एक तरफ लालू प्रसाद की तस्वीर है तो दूसरी ओर राबड़ी देवी की। कहने का तात्पर्य यह है कि राजद में यदि लालू प्रसाद के बाद किसी की प्रतिश्ठा है तो वह हैं राबड़ी देवी। राबड़ी देवी लालू प्रसाद के मुख्यमंत्री पद की भी उत्तराधिकारी रह चुकी हैं, ऐसे में अधिक संभव है कि अपने पसंदीदा लोस क्षेत्र से लड़ने के लिए लालू प्रसाद उन्हें ही उतारें। यह भी देखने वाली बात है कि राबड़ी देवी पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव में सोनपुर विस क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार से हार चुकी हैं। कहीं न कहीं सोनपुर के मतदाताओं में राजद के प्रति रोश है। लालू प्रसाद के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में उनके बाद पार्टी में सबसे बड़ा कद यकीनन राबड़ी देवी का ही है, ऐसे में पार्टी का कोई कार्यकर्ता यह नहीं चाहता कि किसी भी कीमत पर राबड़ी देवी को लोस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़े।
 |
| Narendra Modi |
इसके लिए आवष्यक है कि राजद के लिए सबसे अधिक सुरक्षित समझी जाने वाली सीट से ही उनकी उम्मीदवारी हो और राजद के लिए छपरा से अधिक सुरक्षित सीट षायद ही कोई और हो। बता दें कि छपरा की महिला मतदाताओं में राबड़ी देवी की गहरी पैठ है। वे तब भी छपरा आती रही हैं, जब लोस चुनाव लालू प्रसाद लड़ रहे होते थे। यहां के विभिन्न परिवारों के षादी-विवाह आदि समारोहों में उनकी उपस्थिति कभी-कभार हो ही जाती है। इस तरह लालू प्रसाद के बाद उनके परिवार व पार्टी में भी छपरा से सबसे अधिक राबड़ी देवी ही जुड़ी हैं। लिहाजा, समर्थक मानते हैं कि यदि लालू का उत्तराधिकारी लालू परिवार से कोई हो सकता है तो वह सिर्फ राबड़ी देवी ही हैं। यदि छपरा के मतदाता व्यक्तिगत रूप से लालू प्रसाद के बाद उनके परिवार में किसी को जानते हैं तो वह राबड़ी हैं। सिर्फ वहीं हैं जिनके नाम पर यादव मतदाता तो एकजुट होगा ही, अन्य जातियों की महिलाएं भी लालटेन की रोषनी बढ़ाएंगी। यह भी गौरतलब है कि राजद का सामना करने वाले भाजपा व जदयू में दूर-दूर तक कोई महिला उम्मीदवार नजर नहीं आती, ऐसे में राजद राबड़ी देवी को छपरा सीट से पेष कर महिला मतदाताओं के बड़े वर्ग को अपनी तरफ करने में सफल हो सकता है।
 |
| Rabari Devi |
 |
| Rajiv Pratap Rudi |
इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि छपरा सीट राजद के लिए अब उतनी सुरक्षित नहीं रही है, जितना कभी थी। इस बार छपरा लोस क्षेत्र का चुनाव अधिक घमासान होने वाला है। अभी तक यहां का चुनाव परिणाम प्रायः एकतरफा ही रहा है। भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद अक्सर भारी पड़े हैं। लेकिन, अभी सियासी फिजां बदल गयी है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र भाई मोदी की लहर को कमतर कर नहीं आंका जा सकता। मोदी फैक्टर छपरा में भी कमोबेष काम करेगा। ऐसे में, राजद के लिए यह आवष्यक है कि उसका उम्मीदवार ऐसा हो, जो मोदी लहर को झेल सके। यह भी देखने वाली बात है कि पूर्व में भाजपा और जदयू के साथ रहते यह सीट भाजपा कोटे की थी, लेकिन अब भाजपा से अलग होने के बाद जदयू भी इस सीट के लिए अपनी जोर आजमाईष करेगा। लिहाजा, राजद प्रत्याषी को इस बार दो-दो प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ेगा। जहां हर बार की तरह भाजपा की ओर से इस सीट पर रूड़ी की चर्चा है वहीं जदयू की ओर से विधान परिशद् के सभापति सलीम परवेज का नाम सबसे प्रमुख है। इस क्रम में कुछ लोग जदयू जिलाध्यक्ष व अमनौर विधायक कृश्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू का नाम भी ले रहे हैं। चूंकि जातीय दृश्टिकोण से छपरा यादव-राजपूत बहुल क्षेत्र है, अतः यहां से राजपूत उम्मीदवार के रूप में मंटू सिंह सलीम परवेज से अधिक सार्थक दिख रहे हैं। चर्चा तो यह भी है कि जदयू इस बार यादव उम्मीदवार की खोज कर रहा है ताकि वह प्रतिद्वंद्वी राजद उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दे सके। यानी, इस बार राजद को सिर्फ भाजपा को ही नहीं हराना होगा, बल्कि जदयू उम्मीदवार का भी सामना करना होगा।
यह भी देखने वाली बात होगी कि यदि जदयू की ओर से उम्मीदवार कोई यादव होता है तो राजद को यादव वोटों का बिखराव रोकना और राजपूत वोटों को जोड़ना काफी मषक्कत भरा काम होगा। जाहिर है, राजद लालू का उत्तराधिकारी उसी को बनाएगा, जो छपरा सीट को प्रतिद्वंद्वी महारथियों से बचाते हुए अपने कब्जे को बरकरार रख सके और इस तरह कुल मिलाकर एक ही नाम राजद के सामने बार-बार आ रहा है- राबड़ी देवी।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणियों का स्वागत है लेकिन फूहड़ शब्द निषेध हैं।