नगर निकाय चुनाव : होगी बस जाति, पैसे व शराब की बात
नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी हो गयी है। नामांकन के बाद प्रत्याशियों के नाम भी साफ हो गए हैं, लेकिन प्रत्याशियों के इन नामों की तरह छपरा जिले की नगर परिषद व नगर पंचायतों के मतदाताओं का इरादा भी बिल्कुल साफ है। इतना साफ, कि प्रत्याशियों को पढ़ने में कोई दिक्कत ही नहीं। सवाल इतने बेबाक हैं कि जवाब देने की बजाय प्रत्याशी पीछे कदम वापस हो रहे हैं। छपरा नगर परिषद समेत मढ़ौरा व रिविलगंज नगर पंचायतों में भी विकास का पहिया स्थिर रहा। ऐसे में, वोटरों की जो समस्याएं वर्षों पूर्व थीं, वे आज भी ज्यों की त्यों हैं। हालात यह है कि विकास के नाम पर उनसे वोट मांगने की हिम्मत निवर्तमान पार्षदों में रह ही नहीं गयी। इधर, वार्डों के पूर्व पार्षद, जो पिछले चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे, इस बार विकास के मुद़दे पर निवर्तमान पार्षद प्रत्याशियों को घेर रहे हैं। ऐसे में, दोहरा प्रहार झेलने की बजाय, प्रत्याशियों के पास वही पुराना विकल्प एक बार फिर दिखाई दे रहा है, जिसकी बदौलत हमेशा राजनीति की गोटी लाल होती रही है। जी हां, जाति, पैसा और शराब। बाहुबल का काम अब चुनावों में नहीं रहा, लेकिन जाति, शराब और पैसा अब भी ऐसे हथियार हैं जो धड़ल्ले से आजमाए जा रहे हैं।
छपरा नगर परिषद में कुल 44 वार्ड हैं जबकि यहां से नामांकन करने वाले प्रत्याशियों की संख्या 253 है। इनमें वे प्रत्याशी भी शामिल हैं जो अभी-अभी अपना कार्यकाल समाप्त किए हैं, तो वे भी शामिल हैं, जिन्हें पिछले चुनाव में वोटरों ने उनकी औकात दिखाई थी। कुछ ऐसे भी चेहरे हैं, जिन्हें खुद पे भरोसा जगा है और पहली बार राजनीति के आखाड़े में दो-दो हाथ करने उतरे हैं। छपरा नगर परिषद के कुछ वार्डों में लड़ाई घमासान होने वाली है। इसमें कुछ ऐसे वार्ड हैं, जहां चुनाव तो पार्षद पद के लिए होगा, लेकिन प्रतिष्ठा दांव पर होगी जिले के कुछ राजनीतिक दिग्गजों की। छपरा नगर परिषद के पूर्व उपमुख्य पार्षद रामाकांत सिंह उर्फ डब्लू का वार्ड एक ऐसा ही वार्ड है। पिछले दिनों, यहां शिलापट़ट पर नाम को लेकर, सूबे में श्रम संसाधन मंत्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल व उनके समर्थकों से डब्लू की ठन गई थी। इस मामले में दोनों पक्षों से एफआईआर तक हो चुकी है। मामले की जड़ में नगर परिषद क्षेत्र में सदर अस्पताल चौक के पास नाला निर्माण को लेकर लगने वाला शिलापट़ट है। बताते हैं कि योजना नगर परिषद की है और शिलापट़ट पर सिर्फ मंत्री सिग्रीवाल का नाम था। वार्ड पार्षद व समर्थकों का कहना था कि इस शिलापट़ट पर संबंधित वार्ड पार्षद, नगर परिषद के मुख्य पार्षद व कार्यपालक पदाधिकारी का भी नाम होना चाहिए था। बस, इसी बात पर मंत्री समर्थकों व वार्ड पार्षद समर्थकों में बकझक हुई और बात मारपीट और फिर थाने तक पहुंच गई। ऐसा माना जाता है कि डब्लू सिंह, महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के खास हैं और यह भी सर्वविदित है कि पूर्व सांसद की वर्तमान मंत्री सिग्रीवाल से 36 के आंकड़े हैं। यह भी बता दें कि पूर्व में भी प्रभुनाथ सिंह के हनुमान कहे जाने वाले तत्कालीन छपरा विधायक रामप्रवेश राय ने सिग्रीवाल को शहर के बीच बेइज्जत करने की कोशिश की थी। अब, इस वार्ड में लड़ाई सिर्फ पार्षद की नहीं, बल्कि प्रभुनाथ सिंह व जनार्दन सिंह सिग्रीवाल समर्थक गुटों में है। यहां जीत और हार के लिए वे सभी तिकड़म आजमाए जा सकते हैं, जो अब तक विधानसभा चुनावों में आजमाते रहे हैं क्योंकि सवाल पार्षद पद से भी आगे का है।
रिविलगंज नगर पंचायत बिहार के सबसे पुराने नगर पंचायतों में शुमार है। इस पंचायत के कुल 21 वार्डों के लिए 89 प्रत्याशी मैदान में हैं। हालांकि, अभी नामवापसी होनी बाकी है, लेकिन माना जाता है कि इस बार के चुनाव में जो भी प्रत्याशी नामांकन किए हैं, वे लड़ने के लिए ही मैदान में उतरे हैं। यानी, नामवापसी तिथि बीतने के बाद भी प्रत्याशियों की संख्या में बहुत अधिक अंतर नहीं आने वाला। रिविलगंज नगर पंचायत में भाजपा बनाम राजद की लड़ाई शुरू से ही चलती रही है। अत: यहां भी पार्षदों के बहाने राजनीति के बड़े धुरंधर आखाड़े में बाजी आजमाए तो कोई बड़ी बात नहीं।
रिविलगंज नगर पंचायत बिहार के सबसे पुराने नगर पंचायतों में शुमार है। इस पंचायत के कुल 21 वार्डों के लिए 89 प्रत्याशी मैदान में हैं। हालांकि, अभी नामवापसी होनी बाकी है, लेकिन माना जाता है कि इस बार के चुनाव में जो भी प्रत्याशी नामांकन किए हैं, वे लड़ने के लिए ही मैदान में उतरे हैं। यानी, नामवापसी तिथि बीतने के बाद भी प्रत्याशियों की संख्या में बहुत अधिक अंतर नहीं आने वाला। रिविलगंज नगर पंचायत में भाजपा बनाम राजद की लड़ाई शुरू से ही चलती रही है। अत: यहां भी पार्षदों के बहाने राजनीति के बड़े धुरंधर आखाड़े में बाजी आजमाए तो कोई बड़ी बात नहीं।
शहरी क्षेत्र में जिले में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला नगर पंचायत है मढ़ौरा। यहां के 16 वार्डों के लिए 64 नामांकन दाखिल हुए हैं। लड़ाई यहां भी दिलचस्प होगी लेकिन मुददा विकास नहीं होगा। मढ़ौरा में भी पिछले पांच वर्षों में संसाधनों का रोना रोते नगर पंचायत का कार्यकाल कटा है, ऐसे में यदि निवर्तमान प्रत्याशी पुन: जीतेंगे भी तो उसका आधार उनके द्वारा कराए गए विकास कार्य न होकर रुपया, जाति, शराब होगी, या फिर इनमें से कोई एक।
दिघवारा नगर पंचायत राष्ट्रीय राज्यमार्ग- 19 पर स्थित है। इस नगर पंचायत के 18 पदों के लिए कुल 58 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
जिले के एक नगर परिषद व तीन नगर पंचायतों के कुल 120 पदों के लिए 545 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से कुछ चेहरे जरूर नए होंगे, लेकिन नगर निकाय चुनाव में जीत के लिए वही तिकड़म व तरीके आजमाए जाएंगे, जिनसे लोकतंत्र सदा शर्मसार होता आया है।
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