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यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।

अपनी हद न भूले आदमी, खुदा न बने आदमी...!

आंखों देखी! पंचायत चुनाव के पहले की एक रात।

नेता से अच्छा बेटा

कुछ रुपयों के लिए मौत बांटना कहां तक जायज?

बोल तो दिया है लेकिन एक बार सोच लो!

आयोग बताए, ऐसे में कैसे मुमकिन है निष्पक्ष चुनाव?

हमीं चुनते हैं नेता! हमें तो यकीन नहीं, क्या आपको है?

लो आ गए राहुल भैया, नाचो ता थईया ता थईया ता थईया...

आजकल होमगडवे सीओ बाड़न...

'जैसा दाम, वैसा काम' शिक्षकों के साथ क्यों नहीं?

हैरान न हों, यह रोग पुराना है

सत्ता चली गांव की ओर...???

आप की जीत और उसके चर्चें

दिल्ली चुनाव परिणाम के बहाने

यहां गोरखपुर में सांड़ हैं, वहां बनारस बदनाम है...

यह चुनावी सवाल हैं जनाब!