बात की फुरसत किसे है, बस लाठी खाओ, घर जाओ...


आजकल छात्रों से बात करने वाला कोई नहीं, लेकिन लाठी बरसाने में तनिक देर नहीं। सवाल करने, तर्क करने, हक मांगने, शिकायत करने वालों की आजकल खैर नहीं है। अभी सिर्फ वहीं अच्छे हैं जो बोलें कुछ नहीं, सिर्फ सुनें और हर वाक्य के समाप्त होने से पहले जोरदार ताली बजाएं, सभा विसर्जन पर नारें लगाएं, लड्डू खाएं, अपने घर जाएं...।
कुछ दिन पहले डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में यही हुआ। छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों का कचूमर निकालकर मुकदमे ठोंक दिए गए। सब अस्पताल में, थाने में पहुंच गए। जब प्रशासन को लगा कि अब छात्र अपनी 'औकात' में आ गए तब मुकदमे वापस भी ले लिए। अपराधी बनते-बनते बच गए छात्र। लगा केस खत्म हो गया, यही क्या कम है? अब डीडीयू में हर तरफ सन्नाटा है, छात्र संघ चुनाव के नाम पर चुप्पी छाई हुई है...।
आज सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में थे। बीएचयू की घटना को अपने अंदाज में 'सॉल्व' करने पर आह्लादित थे। बोले कि जांच पूरी होने वाली है, रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी जाएगी। चूंकि बीएचयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है इसलिए कार्रवाई केंद्र सरकार को ही करनी है। (मतलब हमको करना होता तो अब तक कर चुके होते।) और हां, आगे योगी जी ने घोषणा की कि जिन छात्रों पर केस दर्ज हुए हैं, वे वापस लिए जाएंगे...। माने केस फर्जी है, ऐसा भी न समझिए। यह योगी जी की उदारता है जो उन्होंने डीडीयू मामले में भी दिखाई थी।
बीएचयू में बवाल के बाद विवि प्रशासन से लेकर सरकार तक एक्टिव है। आंदोलन करने वालों को ऐसे ढूंढा जा रहा है, जैसेे जितनी जल्दी सूली पर लटका दो, देश में उतनी ही शांति रहेगी। इस समय सरकार हो, विवि हो, अधिकारी हो, नेता हो... किसी के सामने यदि विरोध किया तो यही सबसे बड़ा गुनाह है। जिस गुनाह से रक्षा के लिए अपने आंदोलन का 'गुनाह' किया, वह गुनाह तो न पहले दिखा था, न बाद में दिखता है...। यदि पीड़ित होकर ज्यादा हल्ला-गुल्ला किए, अपने साथ हुए गुनाह की मांग किए तो गुनहगार पर कार्रवाई हो, ना हो, आप तबीयत से ठोंके जाएंगे और गुनहगार भी बना दिए जाएंगे। कुल मिलाकर संदेश यही है कि जुल्म सहिए लेकिन चुप रहिए...।
हां तो आपको बीएचयू सेफ लग रहा है तो मत लिखिए। इसे महामना की बगिया ही लिखिए। हमें जब तक सेफ नहीं लगता, हम तो यही लिखेंगे- #Unsafe_BHU

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