आंखें खोलिए, सच देखिए, सच बोलिए...


प्रिय भक्तजन!
नोटबन्दी के नोटों की गिनती के बाद अब जीडीपी का ग्रोथ रेट भी सामने है। पिछले साल अप्रैल-जून 2016-17 में जीडीपी 7.9 फीसदी थी, इस साल 5.7 हो गई। इसके बाद भी यदि आप देश की अर्थव्यवस्था को सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बताएंगे तो हम तो यकीन नहीं करेंगे। सबसे खास बात यह है कि हालिया ग्रोथ रेट नोटबन्दी के बाद का है यानी उसका परिणाम है।

       खैर, कम कहना ज्यादा समझना। अब भी वक्त है। बेवजह न किसी का पक्ष लीजिए, न विरोध कीजिए लेकिन वजह हो तो चूकिए मत। अपनी प्रशंसा सबको अच्छी लगती है और इस आधार पर व्यक्ति अपना मूल्यांकन भी करता है। यदि हमें हमेशा प्रशंसा सुनने को मिले तो हम खुद में कभी बदलाव करने की नहीं सोचेंगे और यह मान लेंगे कि हम बिल्कुल सही रास्ते पर हैं। यही बात हो रही है अभी। यदि आप किसी की सिर्फ प्रशंसा करें, तब भी जब वह आलोचना के लायक हो तो उसकी बुद्धि तो मारी ही न जाएगी। यदि आप सच में उसके शुभचिंतक हैं उसकी प्रशंसा के साथ जरूरत पड़ने पर आलोचना नहीं तो अपनी शिकायत तो जरूर रखिए। वह चाहे आपका मित्र हो, कोई परिजन हो या देश का निजाम।

    आपकी देशभक्ति पर कोई संदेह नहीं कर सकता बल्कि अब तो आप यह भी तय करते हैं कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं। ऐसे में आप देशभक्तों से आग्रह है कि देश हित में अपनी आंखें खोलिए। बंद आंखों से सिर्फ प्रभु दर्शन करने की जगह खुली आँखों से अपने आस—पास की हकीकत देखिए। वह अच्छा है तो अच्छा कहिए, बुरा है तो बुरा कहिए। खुद मुखर होइए और कोई दूसरा बोले तो उसे भी सुनिए। यह सिर्फ देश हित में ही नहीं, आपके हित में भी है। उनके हित में भी, जिनके कुछ गलत करने पर भी उनके बारे में की गई टिप्पणी आपको नागवार गुजरती है। यदि आप लगातार किसी की प्रशंसा करने की जगह, वह जैसा है, वैसा कहिएगा तो परिणाम सदैव सुखद होंगे। यदि आप हर समय सिर्फ वाह—वाह करते रहेंगे तो आखिरी में आह की आवाज भी आ सकती है।

       किसी को भी मेरे इस पोस्ट को व्यक्तिगत लेने की कतई जरूरत नहीं है। यह सभी पर एक समान लागू होता है। भक्त, अभक्त सब पर। किसी का भी प्रशंसक बनिए लेकिन सिर्फ इतना कि उसे अच्छा करने की स्थिति में आप वाह-वाह करें लेकिन खुद को इतना जरूर बचाए रखिए कि अच्छा नहीं करने पर विरोध भी कर सकें।

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