बुलेट ट्रेन तो ठीक है लेकिन कुछ नजर—ए—इनायत इधर भी...
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| गोरखपुर जंक्शन के पूछताछ काउंटर पर ट्रेन की जानकारी लेने के लिए परेशान यात्री। |
यशस्वी प्रधानमंत्री के प्रयास से देश में बुलेट ट्रेन की आधारशिला रख दी गई है। बहुत अच्छी बात है। देश को एक नई पहचान मिलने जा रही है, देशवासियों को एक तेज रफ्तार वाला यातायात—माध्यम मिलने जा रहा है। ऐतिहासिक क्षण है लेकिन और अच्छी बात होगी यदि इतिहास की गलतियों को वर्तमान में सुधारकर, नए भविष्य का निर्माण करने की कोशिश की जाती। भारतीय रेल को डिरेल व्यवस्था को पटरी पर लाई जाती...।
...अपने सबसे लंबे प्लेटफॉर्म के चलते गोरखपुर रेलवे स्टेशन वर्ल्ड फेमस है लेकिन सुविधाएं? हालत यह है कि आपकी ट्रेन कब आएगी, किस प्लेटफॉर्म पर आएगी, आएगी भी या नहीं, बताने वाला कोई नहीं है। जी हां, सबकुछ ऑनलाइन है और डाटा की भी चिंता नहीं करनी क्योंकि स्टेशन पर फ्री वाई-फाई भी है लेकिन जब ऑफलाइन ही सूचना नहीं है तो ऑनलाइन क्या होगी?
55008 गोरखपुर-पाटलिपुत्रा ट्रेन गोरखपुर से ही चलती है, 1.20 बजे। हम 12 बजे से स्टेशन पर हैं। पूछताछ काउंटर पर कोई नहीं है। अंदर दो लोग जरूर दिख रहे हैं लेकिन उन्हें आप सिर्फ देख ही सकते हैं। न तो वह आपका कहा सुनेंगे और न आप कुछ पूछें तो वे बोलेंगे ही। यानी गूंगे के साथ बहरे भी हैं। काउंटर पर एक 'श्यामपट्ट' लगा है। इसके अनुसार ट्रेन 1.20 पर प्लेटफॉर्म 9 पर आएगी लेकिन 1.10 तक प्लेटफॉर्म 9 पर इंतजार करने के बाद भी ट्रेन नहीं आई तो यात्रियों में अफरातफरी मची। हमने ऑनलाइन स्टेटस चेक करने की कोशिश की तो वह भी बेकार। कोई अपडेट नहीं इसके अलावा कि ट्रेन अभी खुली नहीं है। प्लेटफॉर्म लोकेटर यूज़ किया तो वह बाई डिफॉल्ट प्लेटफॉर्म 1 बता रहा था जबकि श्यामपट्ट पर हमने प्लेटफॉर्म 9 देखा था। इस आशंका से कि कहीं प्लेटफॉर्म बदल तो नहीं गया? भीड़ के साथ हम भी 8 प्लेटफॉर्म लांघकर, प्लेटफॉर्म 9 से फिर 1 नंबर पर स्थित पूछताछ काउंटर पर पहुंच गए। यहां अब भी श्यामपट्ट पर माट साब का वही लिखा पड़ा है। लोग उसे ऐसे देखे जा रहे हैं जैसे अचानक अपने आप सूचना बदल जाएगी। सभी घबराए हुए हैं कि ट्रेन का टाइम हो गया लेकिन अभी तक ट्रेन आई क्यों नहीं? कहीं छूट न जाए। कुछ लोग पूछताछ काउंटर पर पूछने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वह तो गूंगा है। उसका वह कान (होल) भी बंद है जिसमें मुंह लगाकर बोला जा सके।
हम थोड़ा रिस्क लेकर पीछे के दरवाजे से सीधे अंदर चले गए। पूछा तो जवाब बिल्कुल सरकारी कर्मचारी वाला ही मिला। मेरे साथ तमाम यात्रियों की तकलीफ का आप भी 'मजा' लीजिए क्योंकि देश बदल रहा है, हालात नहीं...।
- सर, ट्रेन अभी तक प्लेटफॉर्म 9 पर नहीं लगी है, कहीं किसी और प्लेटफॉर्म पर तो नहीं लग गई है ना?
- ट्रेन अभी आई नहीं तो लगेगी कैसे?
- सर, कब तक आएगी? टाइम तो हो गया है।
- अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
- जब आएगी तब किस प्लेटफॉर्म पर आएगी?
- बोर्ड देखते रहिए।
- बोर्ड पर तो 9 लिखा है लेकिन 9 पर ट्रेन नहीं है।
- कहा ना, बोर्ड देखते रहिए...।
.... जो पढ़े नहीं हैं, जो बहुत पढ़े हैं, जिनके पास सादा मोबाइल है, जिनके पास स्मार्ट फोन है... सब बोर्ड देख रहे हैं।

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