यह तस्वीर, उस तस्वीर का जवाब नहीं नीतीश जी...

बिहार की राजनीति अब तेरी माँ की, तेरी बहन की तक की बेशर्मी पर उतर आई है। पहले भी मंच से लालू-राबड़ी गाली देते रहे हैं लेकिन नीतीश ने उससे भी ऊपर जाकर इसे घृणा की हद तक पहुंचा दिया है। नीतीश अपनी राजनीतिक कब्र खोदने में लग गए हैं। विपक्ष के सीधे और जायज सवाल का जवाब न देकर सवालों का रुख ही मोड़ दिया। हालत यह है अब हर कोई अपनी तस्वीर बचाने में लगा है, अपना इतिहास संभालने में जुटा है और हर कोई एक-दूसरे की कब्र खोदने में लगा है वह भी राजनीति से आगे जाकर निजी स्तर पर...। 

     नीतीश की एक शराब माफिया के साथ तस्वीर सामने आने के बाद इस बवाल की शुरुआत हुई। नीतीश को इस पर सीधा जवाब देना चाहिए था लेकिन जवाब था नहीं इसलिए बेशर्मी पर उतर आए। कौन नहीं जानता कि इस सरकार में शराबबंदी कानून लाने वाले ने ही पिछली सरकार में पंचायत स्तर पर शराब के ठेके बांटे थे? क्या बिहारवासी इससे अनभिज्ञ हैं? नीतीश ने ही पहले बिहार को शराब माफियाओं का अड्डा बनाया, फिर शराबबंदी कर वाहवाही भी लूटी और अब जबकि नीतीश के साथ किसी शराब माफिया की तस्वीर सामने आती है तो विपक्ष ही क्यों, जनता भी जानना चाहेगी कि ऐसा क्यों है?

     किसी मुख्यमंत्री के साथ किसी शराब माफिया की सेल्फी होना कोई छोटी बात है क्या? वह भी किसी सार्वजनिक जगह नहीं बल्कि ड्राइंग रूम में? जिसे बिहार ने विकास पुरुष का खिताब दिया, वह शराब माफिया के साथ दिखे तो कौन यह रिश्ता नहीं समझना चाहेगा? इस तस्वीर पर नीतीश को सीधा जवाब देना चाहिए था या जनता से माफी मांगनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने तस्वीर के बदले तस्वीर उछाल दी। तेजस्वी के साथ इस युवती की यह तस्वीर जिसे नीतीश की तरफ से उनके लोगों ने पेश की है; क्या एक मुख्यमंत्री और एक शराब माफिया की सेल्फी का जवाब हो सकती है कभी? एक क्रिकेटर (तब तेजस्वी की यही पहचान थी) और उसकी फैन की तस्वीर; यदि गर्लफ्रेंड ही मान लें तो भी इसमें क्या गलत है जब तक कि इस तस्वीर में जो लड़की है, वह खुद कोई आपत्ति न करे? और इस तस्वीर में चौकाने वाला भी क्या है? यह तस्वीर एक बार पहले भी सामने आ चुकी है। तेजस्वी का यह बयान सही है कि नीतीश ने इस लड़की के चरित्र हनन की कोशिश की है...।
    
     बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप में निजी स्तर तक पहुंच जाना कोई नई बात नहीं है लेकिन अब तक यह चुनावी रैलियों में ही होता रहा है। विधानसभा चुनाव में राक्षस, पिशाच जैसे शब्द भी इस्तेमाल किए गए लेकिन तब भी किसी की निजी तस्वीर नहीं उछाली गई। अब तो संजय सिंह का परिवार भी नहीं बचा। ऐसी आग लगाई है नीतीश ने कि कहना मुश्किल है कि कब, किसकी, कौन सी तस्वीर सामने आएगी। नीतीश की तरफ से यह पूछा जाना कि तेजस्वी दिल्ली क्या करने जाते हैं, यह सवाल भी ओछा ही है। इसके बावजूद जब तेजस्वी ने बता दिया है कि उनकी छह बहनें यहां रहती हैं इसलिए दिल्ली आते हैं तब नीतीश को भी तेजस्वी के सवालों का जवाब दे ही देना चाहिए कि दिल्ली आने के बाद वे खुद बिहार भवन से गुड़गांव तरफ कहाँ जाते हैं? तेजस्वी ने तो बता दिया कि यह तस्वीर उनके फैन की है; अब नीतीश क्या बता पाएंगे कि उन्होंने बतौर रेलमंत्री जो दो ट्रेन चलाई थी उनका नाम अर्चना, उपासना एक्सप्रेस क्यों था? और हां, जिस एक सवाल का जवाब न देने के लिए इतने सारे सवाल उछाले गए, उसका जवाब तो फिर भी नीतीश को देना होगा वरना जनता खुद ही इसका जवाब समझ जाएगी जैसे अर्चना-उपासना वाले सवाल का जवाब बिना बताए भी सब जानते हैं। इसलिए अब कोई अगली तस्वीर उछालने की बजाय नीतीश को सामने आकर बताना ही चाहिए कि शराबबंदी वाले मुख्यमंत्री के साथ शराब माफिया की क्या डील हुई? क्यों वह साथ था जबकि वह शराब से हुई मौत मामले में आरोपी भी है। बाकी चारा घोटाले को प्रचारित कर सत्ता लेने वाले विकास पुरुष को उन घोटालों का जवाब भी देना चाहिए जो उनके सुशासन में हो रहे हैं, जिनके आरोप उन पर लग रहे हैं। सियासत के सवालों का सियासी जवाब होना चाहिए, न कि उससे बचने के लिए निजी रिश्तों की कोई तस्वीर उछाली जानी चाहिए...।

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