प्रिय हिंदी... वह तेरा प्रेम ही है जिसमें पड़कर मेरा यह हाल है...

मेरी हिंदी का,
आज हमसे सवाल है;
प्रिय,
तेरे होते ये मेरा क्या हाल है?
प्रश्न का असर-
दिल से,
हिंदी प्रेम समाप्त है,
दिल में,
क्रोध, क्षोभ का ज्वार है...
थोड़ा अपने लिए,
थोड़ा अपनी हिंदी के लिए
रोना है, फिर-
जोरों का अट्टाहास है
चेहरा अब तक...
गुस्से से लाल है
अंग्रेजी की आग में झुलसे...
हिंदी के दिल का,
हिंदी को जवाब है-
चुप रह हिंदी,
तू क्या जाने...
वह तेरा प्रेम ही है,
जिसमें पड़कर
आज मेरा यह हाल है...।

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