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सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राम-राम सत है, हर रावण की यही गत है

बात की फुरसत किसे है, बस लाठी खाओ, घर जाओ...

इस साजिश में सब शामिल हैं...

इस 'अच्छे दिन' के लिए महाकवि हमें माफ करें...

बुलेट ट्रेन तो ठीक है लेकिन कुछ नजर—ए—इनायत इधर भी...

बोलने, लिखने, नए लोगों के जुड़ने से ही बढ़ेगी हिंदी

पत्रकार के साथ वामपंथी, और वामपंथी भी ब्रांडेड होना चाहिए!

कबूलनामा... वंशवाद कबूल है!

सबने गलती की, यह नहीं होना चाहिए था...

... तब तो टायलेट में लिखने वाले भी पत्रकार हैं!

लक्ष्य से भटक गए या लक्ष्य ही कुछ और है...?

जाति नहीं, काम देखिए...

आंखें खोलिए, सच देखिए, सच बोलिए...