संदेश
वो जिस आग को बुझाने के लिए रो रही थी, बाबा तो उसे ही हवा देने निकले हैं...
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इतना भी 'सोशल' न हो जाइए कि अपना कुछ रहे ही नहीं
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हर पुल कमजोर ही बनेगा, जब तक आरक्षण का पुल मजबूत है
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यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।
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अपनी हद न भूले आदमी, खुदा न बने आदमी...!
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आंखों देखी! पंचायत चुनाव के पहले की एक रात।
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