संदेश

ऊपर वाला सब देख रहा है ...

कौन महाराज...? किसका महाराज...?

हम हैरान रह गए यह देखकर कि छपरा तो कुछ बदला ही नहीं था...

मीलॉर्ड! इसे फैसला कह सकते हैं, न्याय नहीं!

शाबाश! यह भी कोई कम नहीं

यह है कश्मीरियत तो इससे कश्मीर को बचाइए!

जिसने सिखाया या जिनसे सीखा, सभी को प्रणाम!

पब्लिक के बीच के इन पॉलिटिशियन से जरा बच के...।

ओह! वेदप्रकाश शर्मा नहीं रहे...

वो जिस आग को बुझाने के लिए रो रही थी, बाबा तो उसे ही हवा देने निकले हैं...

मां के लिए एक ही दिन क्यों...?