संदेश

धत... तुम इसे प्यार कहते हो!

यहां तो नेता और बलात्कारी एक जैसे नजर आते हैं...।

अपनी हद न भूले आदमी, खुदा न बने आदमी...!

आंखों देखी! पंचायत चुनाव के पहले की एक रात।

नेता से अच्छा बेटा

कुछ रुपयों के लिए मौत बांटना कहां तक जायज?

बोल तो दिया है लेकिन एक बार सोच लो!

आयोग बताए, ऐसे में कैसे मुमकिन है निष्पक्ष चुनाव?

हमीं चुनते हैं नेता! हमें तो यकीन नहीं, क्या आपको है?

लो आ गए राहुल भैया, नाचो ता थईया ता थईया ता थईया...

आजकल होमगडवे सीओ बाड़न...