संदेश

यह राष्ट्रवाद नहीं, नौटंकी है!

देश के प्रधान सेवक को देश के मामूली सेवक का पत्र...

अम्मा...

अमोघ 'झूठास्त्र' की निंदा न कीजिए, प्रधानमंत्री की इस कला को नमस्कार कीजिए!

समान नागरिक संहिता का वादा भी झूठ था...?

मोदीजी! याद कीजिए, एनपीए वाला वादा...

जब गड्ढों से गुजरते हुए चिकनी सड़क की खबरें पढ़ रहे हों तो समझ जाना...

कैडर... जिनपर भाजपा को नाज है...

गोरखपुर में उपेंद्र नहीं, योगी हारे हैं...

​जिंदों का कुछ तो ख्याल कीजिए, इन बूतों से खुद को आजाद कीजिए...

किसे छापना है, किसे दिखाना है, यह टीआरपी से तय होता है...

मीडिया में भी ओवैसी हैं; एक नहीं, कई...

आज हिंदू भी जरूर लिखिए... या फिर कभी मुस्लिम—दलित भी न लिखिए!

यदि अम्बेडकर युग यही है तो इसे आने न दीजिए...