राहुल जी, इस जनेऊधारी की भी सुन ही लीजिए...!

बहुत ज्यादा समझना-समझाना नहीं है...। आप जनेऊ अंदर रखिए या कोट के ऊपर पहनिए या जनेऊ ही न पहनिए, कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यदि भगवान राम से ही आपको दिक्कत है तब आपसे भी हमें बहुत दिक्कत है। फिर तो ब्राह्मण छोड़िए, आपको स्वयं के हिन्दू होने पर भी सफाई देनी पड़ेगी और तब भी वह सफाई किसी काम की न होगी...।

     राहुल जी, आपने जनेऊ दिखाकर ललकारा है ब्राह्मणों को, पुकारा है हिंदुओं को...। सहानुभूति बटोरनी चाही है जाति-धर्म के नाम पर तो उसी जाति-धर्म वाले एक नागरिक, एक मतदाता हम भी हैं। ... तो मेरी भी सुन लीजिए! हम ब्राह्मण होकर भी, ब्राह्मण जाति वाले की नहीं, बल्कि उस चरित्र को जीने वाले की पूजा करते हैं। हम राम के क्षत्रिय होने पर भी उनकी पूजा करते हैं और रावण के प्रकांड विद्वान, चारों वेदों का ज्ञाता होने, ब्राह्मण होने पर भी सुबह-सुबह उसका नाम तक नहीं लेते...। इसलिए यदि आप खुद को ब्राह्मण साबित भी कर पाए और हमारे राम के विरुद्ध हैं तो कम से कम इस ब्राह्मण का समर्थन तो आप प्राप्त नहीं कर सकते...!

     राहुल जी, यूं तो आप जन्मते ही कांग्रेस के अघोषित मालिक हैं लेकिन अब आप कांग्रेस के घोषित मालिक होंगे; उसी कांग्रेस के जिसने पहले रामेश्वरम पर प्रश्न उठाया और अब जिसे राम मंदिर से दिक्कत है...। ... तो कांग्रेस के मालिक सुन लीजिए, हमें भी आप जैसों से बहुत दिक्कत है जो हमारे मालिक श्रीराम के विरुद्ध हैं। ...और सुनिए! आपसे या आपके दल से ही नहीं, हमें हर उस शख्स से दिक्कत है जिन्हें हमारे धर्म, हमारी आस्था, हमारे पूजनीय चरित्रों से दिक्कत है...!

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