संदेश

बोलने, लिखने, नए लोगों के जुड़ने से ही बढ़ेगी हिंदी

पत्रकार के साथ वामपंथी, और वामपंथी भी ब्रांडेड होना चाहिए!

कबूलनामा... वंशवाद कबूल है!

सबने गलती की, यह नहीं होना चाहिए था...

... तब तो टायलेट में लिखने वाले भी पत्रकार हैं!

लक्ष्य से भटक गए या लक्ष्य ही कुछ और है...?

जाति नहीं, काम देखिए...

आंखें खोलिए, सच देखिए, सच बोलिए...

हर...हर मोदी! धन्य है यह देश भक्ति!

पाठक से अधिक पत्रकार ध्यान दें!

इतना भी न डराओ कि कहना पड़े- "प्रभु, इन नेताओं से देश बचाओ"