सही है... बीएसएनएल माने भाई साहब नहीं लगेगा!

सरकारी और निजी सेवा में अंतर महसूस करने के लिए मेरे पास इस समय बीएसएनएल और जिओ दोनों की सेवाएं हैं। जिओ का वह सिम जो फ्री में मिला और बीएसएनएल का वह सिम जो एक हजार में भी बड़ी पैरवी के बाद बड़ी मुश्किल से मिलता था। जिओ का सिम कुछ नहीं मांगता, बीएसएनल का सिम हर 6 महीने पर सिर्फ वैलिडिटी के लिए यूहीं 34 या 37 रुपए घोंट जाता है। रोमिंग में बीएसएनएल का टेरिफ काम नहीं करता, जिओ पता नहीं चलने देता कि रोमिंग क्या बला है। खरीद के स्पेक्ट्रम से भी जिओ में भरपूर बात कराने की क्षमता है, सरकारी सेवा होने के बाद भी बीएसएनएल का नेटवर्क गायब है...।
     समझ नहीं आता कि यह कैसे होता है कि निजी कंपनियां सबकुछ सरकार से खरीदकर भी इतनी अच्छी सेवाएं देती हैं और सरकारी कंपनियां सबकुछ आसानी से उपलब्ध होने के बाद भी इतनी घटिया सेवा देती हैं कि उसे सेवा कहने से भी शर्म आए। सच कहें तो बीएसएनएल में नौकरी वाले लोगों, उनके परिवारों की चिंता न रहे तो हम तो कहेंगे कि यह घटिया संस्थान अब बंद कर देना चाहिए...।
      खराब सेवाओं के बाद भी 12 साल तक ढोया बीएसएनएल की सेवा को लेकिन अब तो हद हो गई। तीन दिन हो गए, नोएडा के जिस इलाके में हम हैं, वहां नेटवर्क नहीं है। यही नम्बर सबके पास होने के कारण सबकी शिकायतें हैं कि बात नहीं हो रही। यह तो अच्छा हुआ कि हम उन लोगों के चक्कर में नहीं पड़े थे जो फ्री में जिओ सिम मिलने पर भी इसे घाटे का सौदा करार दे रहे थे क्योंकि अभी जिओ न होता तो दिल्ली आने के बाद पहला काम कोई सिम लेना ही होता...।

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