प्रधानमंत्रीजी, हिम्मत जुटाइए, यह करके दिखाइए तो मानें...

प्रधानमंत्री जी,
देश में जाति के नाम पर बहुत कोहराम मचा हुआ है और जानते हैं सारा कोहराम क्यों मचा है? क्योंकि जाति के नाम पर सबकुछ खैरात में मिल रहा है... राशन, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, टिकट, सत्ता... सबकुछ। यकीन नहीं तो जाति के नाम पर एक बार झटके से देशभर में सरकारी लाभ, आरक्षण खत्म करके देख लीजिए। किसी को याद नहीं रहेगा कि कौन ब्राह्मण है और कौन शुद्र...! नहीं कह रहे कि रामराज आ जाएगा, लेकिन ऐसा करके देखिए, मोदीराज सब पापियों के पाप धो जाएगा, खुद का भी...।

     मोदीजी, अभी तो आपने जाति को योग्यता बना रखी है...। अब सोचिए, जब नौकरियों के लिए यही योग्यता है तो पाने वाले अपनी तो जाति दिखाएंगे ही, दूसरों की भी देखेंगे... वे अपनी जातीय योग्यता साबित करने के लिए ब्राह्मणवाद का काल्पनिक डर दिखाएंगे, सवर्ण को गरियाएँगे और जातिवाद के विरोध के नाम पर खुद घोर जातिवादी बन जाएंगे, खुलकर आतंक मचाएंगे और मनुस्मृति के विरोध की नौटंकी भी करेंगे...। यह सब स्वाभाविक है जब तक सबकुछ जाति के नाम पर दिया-लिया जा रहा है। हां, यदि सच में इस जातीय नौटँकी का समाधान चाहते हैं तो हर क्षेत्र में नौकरियों को उसके लिए जरूरी योग्यता के आधार पर देना शूरू कीजिए फिर देखिए कि कैसे सबकुछ सही हो जाता है। कैसे हर कोई खुद को उस नौकरी के योग्य बनाने के लिए मेहनत करने लग जाता है और कैसे आरक्षण मांग रहे निठल्ले मेहनत करने लग जाते हैं...। यह करके तो देखिए, फिर जाति के नाम पर हुड़दंग करने वाले, नारे लगाने वाले यदि आपको नौकरी के लिए आवेदन भरते, तैयारी करते और इंटरव्यू के लिए इधर-उधर भागते नजर न आएं तो कहिएगा...। जातीय वैमनस्यता, हिंसा की सबसे बड़ा कारण बना है यह आरक्षण जिसे सरकारों ने संरक्षण दिया है... आपकी सरकार ने भी। एक बार हौसला तो कीजिए। यदि इस देश में चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो किसने रोका है, किसी को, कुछ बनने से? यह डर दिखाकर अपने वोटबैंक के लिए इस पाप की मियाद और न बढ़ाइए। अब घड़ा भर चुका है... अब यहीं फोड़िए इसे... किसी मंदिर में नारियल फोड़ने से अधिक पुण्य मिलेगा आपको...।

    मोदीजी, प्रचारक रहे हैं आप। समाजसुधारक की नौकरी रही है आपकी तो यह सब सिर्फ स्वच्छ राजनीति के लिए न कीजिए; उस समाज के लिए भी अब यह कर डालिए जिसके लिए खुद के होने का दावा करते हैं आप। जातीय आरक्षण का खत्म होना सिर्फ इसलिए जरूरी नहीं है कि सबकी योग्यता का सम्मान हो और उसे उसका हक मिले बल्कि देश को उसका हक दिलाने, देश को अधिक सबल, योग्य और प्रतियोगी बनाने के लिए भी यह सबसे अधिक जरूरी है। हर क्षेत्र में योग्य लोग हों इसके लिए आवश्यक है कि कोई योग्य ही उस क्षेत्र विशेष का प्रतिनिधित्व करे, न कि कोई विशेष जाति वाला।  प्रतिभाओं की विविधता झलके देश में, न कि जाति की... अपना देश अपनी योग्यता से जाना जाए, न कि जातीय पहचान बने...। प्रधानसेवकजी, कड़वी दवा कहकर बहुत कुछ पिलाया है आपने, कई कड़े फैसले लिए हैं... हिम्मत जुटाइए और यह कड़वी दवा करके देखिए... देश को सर्वश्रेष्ठ बनाने का बस यही एक तरीका है कि हर जगह श्रेष्ठ व्यक्ति हो, फिर वह किसी भी जाति का हो...। नोट बदली, नोट बन्दी का साहस अन्य ने भी किया है; आप तो बस एक बार जातिबन्दी करने की हिम्मत दिखाइए तो मानें...।

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