कल गणेश चतुर्थी थी...?
सुबह नींद खुली तो व्हाट्सएप से फेसबुक मैसेंजर तक गणेश चतुर्थी की आपकी शुभकामनाओं ने स्वागत किया। अच्छा लगा, अच्छा लगता है जब आप हमें पूजा, पर्व, त्योहारों पर याद करते हैं लेकिन बुरा भी लगता है जब हम आपको अपने ही धर्म, उसमें बताए गए पूजा, पर्व, त्योहारों से अनजान पाते हैं। हममें से कितने तो यह भी नहीं जानते कि पूजा, व्रत, पर्व, त्योहार सब अलग-अलग हैं, सबके अलग महत्व हैं... इसलिए कल भी आश्चर्य नहीं हुआ जब यह पाया हमने कि तमाम लोग हर माह मनाई जाने वाली संकष्टी चतुर्थी और वर्ष में एक बार मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी में अंतर नहीं समझते, इनका महत्व नहीं जानते...! तथापि सोचकर दुःख हुआ कि जो धर्म को मानते हैं वे भी इसे कितना कम जानते हैं...!
आपकी शुभकामनाओं से भला कब परहेज है हमें? जीवन में आपकी शुभकामनाओं का हर क्षण स्वागत है, आज भी है... कल भी किया हमने, आज भी है...लेकिन गणेश चतुर्थी की शुभकामना सितम्बर में ही दीजिए ना...। इतनी भी क्या जल्दी है? जिस गणेश चतुर्थी की शुभकामना आप जो कल हमें लगातार दिए, वह वर्ष में एक बार ही आती है, आपके-हमारे जन्मदिन की तरह... गणेशजी के अवतरण को ही हम गणेश चतुर्थी के रूप में 9 दिनों तक बड़े उल्लास के साथ मनाते हैं और इस वर्ष यह 12 से 23 सितम्बर तक मनाने वाले हैं...।
... तो आखिर कल था क्या? जी, कल भी चतुर्थी ही थी लेकिन गणेश चतुर्थी नहीं, संकष्टी चतुर्थी...! हिंदू पंचाग के अनुसार यह संकष्टी हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन आती है। शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। कल वही संकष्टी चतुर्थी थी। कल से होली तक के पूजा कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हो गई और चूंकि हर पूजा की शुरुआत श्री गणेश की पूजा से होती है इसलिए आज मंगलकर्ता, संकटहर्ता... श्री गणेश की पूजा की सबने...।
इस चतुर्थी से उस चतुर्थी तक, और उसके बाद की हर चतुर्थी तक सारे संकट हरें आपके विघ्नहर्ता गणेश।
जय श्री गणेश!
संकष्टी चतुर्थी के बाद आज पंचमी की भी शुभकामनाएं!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणियों का स्वागत है लेकिन फूहड़ शब्द निषेध हैं।