अब यह दोष भी ब्राह्मणों पर...?
हर बात में ब्राह्मणों को दोष देने वाले अपने स्मृति दोष को कभी नहीं देखते। अब खिचड़ी मनाए खुद ही 14 को, लेकिन दोष उसका भी ब्राह्मणों पर...। प्रायः विप्र ब्राह्मण सिर्फ इसलिए दोषी बन जाते हैं क्योंकि वे कभी प्रतिकार करने सामने नहीं आते और पर्व-त्योहारों को अलग-अलग तारीख में बांटने वाले 'पोंगा पंडित' फेसबुक पर ज्ञान बघारकर मिथ्या दोषारोपण करने में सफल हो जाते हैं...।
अब भला मकर संक्रांति की तिथि में क्या संशय है? भाई, पंडितजी के धार्मिक ज्ञान पर भरोसा नहीं और आप खुद बहुत बड़े वैज्ञानिक हैं तो इतना तो समझ सकते हैं ना कि धरती की गति के अनुसार संक्रांति की तारीख करीब प्रत्येक 100 साल पर आगे बढ़ जाती है? इसी कारण जो खिचड़ी पहले 14 को होती थी, अब 15 को होती है...? यही बात पञ्चाङ्ग देखने वाले ब्राह्मणों ने पिछले साल भी कही थी, इस बार भी बताया लेकिन यदि आपको 14 को ही खिचड़ी मनाने की जिद पड़ी थी तो अब दोष खुद ही लीजिए ना?
आज स्नान, पुण्य कीजिए... और खिचड़ी खाइए-खिलाइए। ब्राह्मण को दान कीजिए, या न कीजिए; हर पर्व-त्योहार पर उस पर मिथ्या दोषारोपण कर बहुत बड़ा 'तीसमारखाँ' बनने की कोशिश न कीजिए! किसी पर्व-त्योहार के महत्व, उसकी तिथि के बारे में कोई भ्रम है तो अपने ब्राह्मण से तर्क कीजिए। एक न बता पाए तो दूसरे से पूछिए, जैसे कि आप किसी विषय को समझने के लिए जरूरत पड़ने पर अधिक योग्य शिक्षक के पास जाते हैं। जाते हैं ना? लेकिन अपनी धर्म-संस्कृति, परंपरा को समझने के लिए आपने कब समय दिया है? अब इतना समय तो देना होगा...!
शुभकामनाएं!
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