संदेश

राहुल जी, इस जनेऊधारी की भी सुन ही लीजिए...!

इस रेप की आजादी तो न दीजिए!

भावनाओं से खेलने पर बैन होना ही चाहिए...

आदमी की भूख पहचानती हैं पक्षियां

सरकार, सरकार कोई दुकानदार नहीं है... समझिए!

मजा किरकिरा हो जाता... 'इश्क' जब सिरफिरा हो जाता...

इस तरह लिखे वन्दे मातरम के तो हम भी विरोधी हैं...

प्रिय हिंदी... वह तेरा प्रेम ही है जिसमें पड़कर मेरा यह हाल है...