संदेश
सरकार, सरकार कोई दुकानदार नहीं है... समझिए!
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मजा किरकिरा हो जाता... 'इश्क' जब सिरफिरा हो जाता...
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इस तरह लिखे वन्दे मातरम के तो हम भी विरोधी हैं...
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प्रिय हिंदी... वह तेरा प्रेम ही है जिसमें पड़कर मेरा यह हाल है...
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थोड़ा गुस्से में, थोड़ा कड़वा, मगर दिल से...
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इतिहास बदल नहीं सकते इसलिए नया इतिहास रचिए...।
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श्रीश्री की इस पहल का हम स्वागत करते हैं!
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बड़ी मासूम हो तुम... यह न जानो तो ही अच्छा!
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