जयप्रकाश विश्वविद्यालय : खत्म नहीं होता परीक्षा फल का इंतजार यहां
अभी तक विद्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर हैरान हुए सारण के नागरिकों को, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों में वर्षों से जारी भ्रष्टाचार की खबर शायद कुछ अधिक नहीं चौंका पाए। लेकिन, परीक्षा के बाद, वर्षों से परीक्षा फल के लिए महाविद्यालयों व विश्वविद्यालय का चक्कर काट रहे सैकड़ों छात्रों की इस पीड़ा पर यदि, इतने दिनों बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन मरहम लगाने का काम करता है तो यह वाकई बड़ी और अच्छी बात होगी।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा से संबद़ध महाविद्यालयों में बगैर रजिस्ट्रेशन स्नातक की परीक्षा लेने की अपनी परंपरा रही है। लेकिन, इस रीति में कई छात्रों का भविष्य चौपट होने के कगार पर है। महाविद्यालयों में नामांकन में दलालों की सक्रियता के कारण यह स्थिति बनी है। बिन रजिस्ट्रेशन छात्रों की परीक्षा लिए जाने से छात्रों का भविष्य तो बर्बाद नहीं होता, लेकिन यदि स्नातक के तीनों वर्षों की परीक्षाएं देने, व विवि द्वारा दो वर्षों का मार्कशीट दिए जाने के बाद तीसरे वर्ष का मार्कशीट इसलिए रोक दिया गया हो कि छात्र का रजिस्ट्रेशन नहीं है, तो फिर क्या छात्र का शैक्षणिक भविष्य बचा रह पाता है? वह भी इसलिए कि जिस कालेज में छात्र का नामांकन है, उसने विवि को उसके रजिस्ट्रेशन का पैसा जमा नहीं किया? गलती महाविद्यालय की, और सजा छात्र को?
कदना गड़ख स्थित देवराहा बाबा श्रीधरदास डिग्री कालेज का, ऐसे कारनामों के लिए सारण जिला क्षेत्र में अलग 'मुकाम' है। राजेन्द्र कालेज से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण एक छात्र ने, इस महाविद्यालय में स्नातक सत्र 07-10 में अपना नामांकन लिया। अगले वर्ष स्नातक (हिंदी प्रतिष्ठा) प्रथम वर्ष के लिए उसे जो एडमिट कार्ड दिया गया, उसमें उसका रौल नंबर (8112655) तो अंकित था, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं था। परीक्षा के समय वीक्षकों द्वारा बताया गया कि उत्तर पुस्तिका में रजिस्ट्रेशन की जगह एनए या एफए अंकित कर दिया जाए। महाविद्यालय के सैकड़ों छात्रों की उत्तर पुस्तिका में स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षा के समय भी यही रजिस्ट्रेशन रहा। छात्र प्रथम और फिर द्वितीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण कर अंतिम वर्ष में प्रवेश कर गए। अंतिम वर्ष की परीक्षा के लिए भी प्रवेश पत्र आ गया। अधिकतर छात्रों के प्रवेश पत्र पर इस बार रजिस्ट्रेशन अंकित था लेकिन, दो साल बीतने पर भी दर्जनों छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका था। लिहाजा, तृतीय वर्ष की परीक्षा में भी छात्रों ने एनए/एफए ही लिखा। रजिस्ट्रेशन न होने से ऐसे छात्रों में अपने परीक्षा फल को लेकर संशय की स्थिति तो शुरू से ही थी लेकिन अंतिम वर्ष में वे काफी परेशान हो गए थे। इन छात्रों को बताया गया कि परीक्षा फल से पहले उनका रजिस्ट्रेशन करा दिया जाएगा और उनका परीक्षा परिणाम प्रभावित नहीं होगा। सत्र 07-10 के स्नातक छात्रों का अंतिम वर्ष का परिणाम भी आ गया लेकिन इसमें इस विद्यालय के दर्जनों छात्रों का परिणाम अब भी लंबित है। छात्रों के अनुसार महाविद्यालय जाने पर बताया जाता है कि उनका रजिस्ट्रेशन विवि द्वारा नहीं किया जा सका है। प्रक्रिया जारी है, जल्द ही उनका मार्कशीट आ जाएगा। विश्वविद्यालय पदाधिकारियों का कहना है कि उक्त महाविद्यालय द्वारा सभी छात्रों के रजिस्ट्रेशन का शुल्क जमा ही नहीं किया गया, जितने छात्रों की फी जमा हुई उनका रजिस्ट्रेशन भेज दिया गया। दर्जनों छात्र अब भी स्नातक की परीक्षा के परिणाम के इंतजार में हैं जबकि उनके ही सहपाठी स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष में पहुंच गए हैं। ऐसे छात्र न तो आगे की पढ़ाई कर सकते हैं और न ही स्नातक स्तर की नौकरियों के लिए आवेदन दे सकते हैं।
सूत्र बताते हैं कि महाविद्यालय में संख्या बल से अधिक छात्रों का नामांकन ले लिया गया लेकिन रजिस्ट्रेशन संख्या बल के आधार पर ही हुआ। लिहाजा, अन्य छात्रों का परीक्षा परिणाम अब भी लंबित है। लेकिन, यदि कारण यह है तब क्या इसके लिए संख्या बल से अधिक नामांकन लेने वाले महाविद्यालय व परीक्षाओं के लिए प्रवेश पत्र जारी करने वाले विवि प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
इसी विद्यालय में स्नातक (गृह विज्ञान प्रतिष्ठा) की सत्र 07-10 की ही छात्रा अंशु प्रिया व प्रीति प्रिया के अनुसार, उनका अंक पत्र महाविद्यालय द्वारा नहीं दिए जाने के कारण वे आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।
अभी, सत्र 08-11 के भी सैकड़ों छात्रों का अंक पत्र महाविद्यालय द्वारा नहीं दिया जा रहा। जिसमें अंग्रेजी के छात्रों की संख्या सर्वाधिक है।
अभी, सत्र 08-11 के भी सैकड़ों छात्रों का अंक पत्र महाविद्यालय द्वारा नहीं दिया जा रहा। जिसमें अंग्रेजी के छात्रों की संख्या सर्वाधिक है।
प्राचार्य का बेतूका बयान
डीबीएसडी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अर्जुन यादव कहते हैं कि जिन छात्रों का परीक्षा परिणाम नहीं आया है, हो सकता है उन्होंने अपने सभी कागजात उपलब्ध नहीं कराए हों। उनसे यह पूछने पर कि छात्र आवश्यक प्रमाण पत्र तो नामांकन व परीक्षा फार्म भरते समय ही उपलब्ध करा देते हैं, फिर क्या परीक्षा फल के लिए उन्हें अलग से प्रमाण पत्र देना होता है? वे स्पष्ट कहते हैं, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के लिए यह कोई मामला नहीं है। मेरे ही क्यों, विश्वविद्यालय के अन्य कालेजों में भी कई बार ऐसा होता है कि छात्र प्रमाण पत्र जमा नहीं कर सके होते हैं और उनका नामांकन हो जाता है। प्रथम व द्वितीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण कर जाना भी बड़ी बात नहीं।
डीबीएसडी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अर्जुन यादव कहते हैं कि जिन छात्रों का परीक्षा परिणाम नहीं आया है, हो सकता है उन्होंने अपने सभी कागजात उपलब्ध नहीं कराए हों। उनसे यह पूछने पर कि छात्र आवश्यक प्रमाण पत्र तो नामांकन व परीक्षा फार्म भरते समय ही उपलब्ध करा देते हैं, फिर क्या परीक्षा फल के लिए उन्हें अलग से प्रमाण पत्र देना होता है? वे स्पष्ट कहते हैं, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के लिए यह कोई मामला नहीं है। मेरे ही क्यों, विश्वविद्यालय के अन्य कालेजों में भी कई बार ऐसा होता है कि छात्र प्रमाण पत्र जमा नहीं कर सके होते हैं और उनका नामांकन हो जाता है। प्रथम व द्वितीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण कर जाना भी बड़ी बात नहीं।
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