शैक्षिक भ्रष्‍टाचार : भविष्‍य तो था ही दांव पर, अब शादी की भी चिंता


शिक्षा में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार से रूबरू होना है, तो शायद बिहार के छपरा स्थित जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय से अच्‍छा नजीर ना मिले। इस विश्‍वविद्यालय में ऐसे कालेज हैं, जो अपनी संख्‍या बल से अधिक छात्रों का नामांकन लेते हैं, उन्‍हें रसीद नहीं देते, परीक्षाएं भी लेते हैं मगर परिणाम नहीं देते। यानी, चोरी भी और सीनाजोरी भी। रूबरू होइए कि कैसे इन कालेजों की लालच और विश्‍वविद्यालय की लापरवाही से छात्रों का भविष्‍य बर्बाद हो रहा है और उनकी जिंदगी तबाह होने के कगार पर है। पढ़ाई और परीक्षा के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिलने से कैरियर तो बना नहीं सकते, नई जिंदगी की शुरूआत मानी जाने वाली शादी में भी बाधा आ रही है। 

कुमकुम और रश्मि ने सत्र 07-10, स्नातक में नामांकन लिया था। समाजशास्त्र में कैरियर बनाने की सोच थी और फिर, इसी के सहारे आगे बढ़ते हुए जिंदगी संवर जाने की आस। 2010 में दोनों बहनों ने स्नातक अंतिम वर्ष (समाजशास्त्र प्रतिष्ठा) की परीक्षा दी। परीक्षा के बाद शीघ्र प्रमाण पत्र आने की उम्‍मीद में दोनों ने नौकरियों के लिए प्रयास शुरू किया और इसी आस में, बेटियों के प्रति अपनी जिम्‍मेदारी का निर्वहन करते हुए माता-पिता ने उनके लिए सुयोग्य वर की तलाश शुरू कर दी। एक साल बीत गया, न तो अंतिम वर्ष की मार्कशीट मिली और न दोनों छात्राएं नौकरियों के लिए आवेदन कर सकीं। हां, इस बीच परिजनों ने अपनी इन दोनों लाडली के लिए उत्‍तम वर ढूंढ लिया। परिजनों ने अपने भावी रिश्तेदारों को, कुमकुम और रश्मि की शैक्षणिक योग्यता स्नातक बतायी थी। उन्हें उम्‍मीद थी कि शादी तक रश्मि व कुमकुम के स्नातक का प्रमाण पत्र हासिल हो जाएगा। मगर, उन्हें क्‍या पता था, रश्मि और कुमकुम की शिक्षा, जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय के महाविद्यालयों में व्याप्त शैक्षिक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। आश्चर्य नहीं कि दोनों छात्राओं का नामांकन, जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय के डीबीएसडी कालेज में ही हुआ था।
26 नवम्‍बर 2011, शनिवार की दोपहर 12.23 बजे एक मैसेज मिला- 'एक घर की चार लड़कियों के भविष्य को कदना कालेज ने निगल लिया है..।' मैसेज में उद्धृत वाक्‍यों में, मैसेंजर की पीड़ा झलक रही थी। जब हमने मैसेंजर से बात की तो, जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय के उक्त महाविद्यालय में नामांकन और रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी तो समझ में आई ही, इस कारण छात्रों का बर्बाद होता भविष्य और फिर, बर्बाद हो रही उनकी जिंदगी की कहानी सुनते ही रोंगटे खड़े हो गए। ...क्‍या कोई शैक्षिक संस्थान इस हद तक गिर सकता है कि पैसे की खातिर, छात्रों का भविष्य, उनका जीवन सबकुछ गिरवी रख दे? जबकि उसकी बुनियाद, इन्हीं छात्रों का भविष्य गढऩे व जीवन संवारने के उद्देश्य से रखी गयी है?
मढ़ौरा, सेमल सराय बहुआरा के श्रीकांत उर्फ बबन सिंह की पीड़ा, उन्हें न पहचानते हुए भी, हमें बहुत द्रवित कर रही थी। आश्चर्य, कि इस पीड़ा से जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय व इसके महाविद्यालयों के अधिकारी कैसे द्रवित नहीं होते? रश्मि (रोल 8113811) और कुमकुम (रोल 8113812) उनकी भतीजी हैं। दोनों की शादी तय हो गई है। ससुराल वाले कह रहे हैं कि स्नातक का प्रमाण पत्र दिखाइए। कई बार समय मांगने के कारण, अब वे स्नातक में अपने भावी बहुओं के नामांकन की बात को भी झूठा मानने लगे हैं। श्रीकांत कहते हैं, प्रियंका और पल्लवी के बारे में भी सोचकर मन कांप जाता है। परिवार की बेटियां प्रियंका (रोल 9112919) और पल्‍लवी (रोल 9112907) भी सत्र 08-11 (स्नातक समाजशास्त्र प्रतिष्ठा) में अंतिम वर्ष की परीक्षा के बाद प्रमाण पत्र का इंतजार कर रही हैं।
विशुनपुरा के रंजन कुमार (रोल 1034357, इतिहास प्रतिष्ठा) भी पार्टवन से ही रजिस्ट्रेशन का आश्‍वासन पा रहे हैं। आखिरकार रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। तरैया, उसरी के उपेन्द्र कुमार (रोल 8113245, राजनीतिशास्त्र प्रतिष्ठा) भी अंतिम वर्ष की मार्कशीट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कालेज कहता है- यूनिवर्सिटी जाओ, यूनिवर्सिटी कहता है- महाविद्यालय जाइए। ओमप्रकाश कुमार (रोल 8113295) के पास इंतजार के सिवा चारा ही क्‍या है? मनोज कुमार (रोल 8205474, भौतिकी प्रतिष्ठा) की व्यथा थोड़ी भिन्‍न है, लेकिन मार्कशीट उन्हें नहीं नहीं मिली। सत्र 08-11 के छात्र, गड़खा के सुबीर कुमार सिंह (मनोविज्ञान प्रतिष्ठा) ने तो नामांकन के लिए सीधे महाविद्यालय के प्राचार्य अर्जुन यादव को ही फार्म व पैसे दिए थे। अभी तक वे 4850 रुपये दे चुके हैं, लेकिन न तो उन्हें कोई रसीद दी गई है और न हीं परीक्षाओं के बाद मार्कशीट। शायद, यह जेपीविवि का पहला कालेज है जहां अधिसंख्‍य छात्रों को नामांकन की रसीद नहीं दी जाती। शिकायतें इतनी हैं कि उल्लेख संभव नहीं, जो उल्लेखित हैं, उसका मकसद यही है कि इस समस्या पर जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय प्रशासन का मौन टूटे और सैकड़ों छात्रों का जीवन बर्बाद होने से बच जाए।
पृथ्वीचंद महाविद्यालय का भी मामला
ऐसा नहीं है कि रजिस्‍ट्रेशन का यह खेल, सिर्फ जेपीविवि के डीबीएसडी महाविद्यालय में ही खेला गया है। पृथ्वीचंद महाविद्यालय के छात्र सुतिहार निवासी राकेश कुमार पांडेय (सत्र 07-10, रोल 6201715) को भी परीक्षा के बाद मार्कशीट नहीं मिली है। कारण रजिस्ट्रेशन नहीं होना है। लेकिन, इसका जवाब कौन देगा कि रजिस्ट्रेशन क्‍यों नहीं हुआ? जबकि छात्रों ने इसके लिए जरूरी प्रमाण पत्र व शुल्‍क समय पर जमा कर दिया था।
(जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय में रजिस्‍ट्रेशन में गड़बड़ी उजागर करने वाली इस खबर को आप, आज के दैनिक जागरण में भी देख सकते हैं।)

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