अजीब दास्तां है ये...
यूं तो शिक्षा में भ्रष्टाचार अब सार्वजनिक व सर्वत्र है, लेकिन बिहार के सारण में यह अपने शबाब पर है। सारण जिले के विद्यालयों/महाविद्यालयों में भ्रष्टाचार के रोज नए खुलासे, छात्रों का भविष्य बेचकर शिक्षा का धंधा करने वाले माफिया/दलालों को मिली छूट, जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाह कार्यशैली, शिक्षा माफियाओं के चंगुल में छटपटाते छात्र- अभिभावक, दलालों के बैग में चलते कई-कई स्कूल...। आने वाले दिनों में इनका परिणाम चाहे जो हो, मगर वर्तमान में ऐसी व्यवस्था का शिकार हो सैकड़ों छात्र भविष्य की चिंता के साथ बदहवाशी के आलम से गुजर रहे हैं।
सारण में शिक्षा के नाम पर विद्यालयों में मची लूट के साक्ष्य के रूप में नित्य नए मामले सामने आ रहे हैं। बगैर संबंधन, वर्षों से छपरा शहर में ही संचालित संजय गांधी इंटर कालेज के मामले में जो नए तथ्य सामने आए हैं, उनसे वाकिफ होने के बाद, आपको पैरों तले जमीन खिसकती महसूस होगी। संभवत: यह जिला ही नहीं, बल्कि बिहार का ऐसा एक मात्र विद्यालय है जिसके बारे में शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों को नहीं पता कि इसके प्राचार्य कौन हैं, प्रभारी कौन हैं, शिक्षक कितने हैं और नामांकन कितना है?
सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर
सारण मुख्यालय शहर छपरा के श्यामचक स्थित संजय गांधी इंटर कालेज में नामांकित सैकड़ों इंटरमीडिएट छात्रों का भविष्य अब दांव पर लगा हुआ है। ऐसे छात्रों की संख्या करीब 500 है। बगैर संबंधन ही विद्यालय ने छात्रों का सत्र 10-12 में नामांकन ले लिया। कुछ ही महीनों बाद बोर्ड की परीक्षा होने वाली है और इन छात्रों के प्रवेश पत्र को लेकर संशय की स्थिति है।
सारण मुख्यालय शहर छपरा के श्यामचक स्थित संजय गांधी इंटर कालेज में नामांकित सैकड़ों इंटरमीडिएट छात्रों का भविष्य अब दांव पर लगा हुआ है। ऐसे छात्रों की संख्या करीब 500 है। बगैर संबंधन ही विद्यालय ने छात्रों का सत्र 10-12 में नामांकन ले लिया। कुछ ही महीनों बाद बोर्ड की परीक्षा होने वाली है और इन छात्रों के प्रवेश पत्र को लेकर संशय की स्थिति है।
विभाग के पास अभिलेख नहीं
संजय गांधी इंटर कालेज से संबंधित प्रायः कोई भी जानकारी विभागीय पदाधिकारियों के पास नहीं है। सारण के प्रभारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनिल दूबे कहते हैं कि संचालकों के बारे में जांच-पड़ताल हो रही है। विद्यालय के संचालक और प्रबंध समिति के सदस्यों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। लेकिन, यह पूछने पर कि विद्यालय का संचालक कौन है, वे नहीं बता पाते। विभाग के अन्य पदाधिकारी भी बताते हैं कि न तो इस विद्यालय के प्राचार्य का नाम पता है, न ही कोई संपर्क नंबर उपलब्ध है। विद्यालय से संबंधित सभी पदाधिकारी, शिक्षक फरार हैं।
संजय गांधी इंटर कालेज से संबंधित प्रायः कोई भी जानकारी विभागीय पदाधिकारियों के पास नहीं है। सारण के प्रभारी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनिल दूबे कहते हैं कि संचालकों के बारे में जांच-पड़ताल हो रही है। विद्यालय के संचालक और प्रबंध समिति के सदस्यों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। लेकिन, यह पूछने पर कि विद्यालय का संचालक कौन है, वे नहीं बता पाते। विभाग के अन्य पदाधिकारी भी बताते हैं कि न तो इस विद्यालय के प्राचार्य का नाम पता है, न ही कोई संपर्क नंबर उपलब्ध है। विद्यालय से संबंधित सभी पदाधिकारी, शिक्षक फरार हैं।
नाम एक, विद्यालय चार
संजय गांधी इंटर कालेज के नाम से छपरा में ही ऐसे चार विद्यालय संचालित हैं जिनका संबंधन नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इनमें से एक दौलतगंज, दूसरा श्यामचक, तीसरा नेहरू चौक और चौथा लोहड़ी में है। इन चारों विद्यालयों के लिए एक चीज कामन है कि इन सभी विद्यालयों में सिर्फ नामांकन होता है और उसके बाद आसानी से सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया जाता है। पढ़ाई से इन चारों विद्यालयों का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
संजय गांधी इंटर कालेज के नाम से छपरा में ही ऐसे चार विद्यालय संचालित हैं जिनका संबंधन नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इनमें से एक दौलतगंज, दूसरा श्यामचक, तीसरा नेहरू चौक और चौथा लोहड़ी में है। इन चारों विद्यालयों के लिए एक चीज कामन है कि इन सभी विद्यालयों में सिर्फ नामांकन होता है और उसके बाद आसानी से सर्टिफिकेट उपलब्ध करा दिया जाता है। पढ़ाई से इन चारों विद्यालयों का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
सन 82-83 से शुरूआत
सन 82-83 ई. में संजय गांधी इंटर कालेज नाम से पहला विद्यालय छपरा शहर में अस्तित्व में आया। पूर्व में विद्यालय में नामांकित छात्रों का दूसरे सरकारी विद्यालयों से फार्म भरवा उन्हें परीक्षा दिलवाई जाती रही। छात्रों की संख्या बढऩे के बाद विद्यालय ने कोशिश की और उसे संबंधन भी प्राप्त होगा। लेकिन, इसी बीच विद्यालय प्रबंधन के लोगों में फूट पड़ी और संजय गांधी इंटर कालेज के नाम वाले चार-चार बोर्ड विभिन्न स्थानों पर लटक गए। बाद में फर्जीवाड़ा सामने आने पर विद्यालय का संबंधन रद कर दिया गया।
हंगामा अभी क्यों?
यूं तो संजय गांधी इंटर कालेज का संबंधन वर्षों पूर्व रद्द कर दिया गया लेकिन हंगामा सत्र 10-12 के छात्रों को लेकर हैं। सवाल उठता है कि यह हंगामा पूर्व में क्यों नहीं हुआ और पदाधिकारियों ने पूर्व में इस विद्यालय की जांच-पड़ताल क्यों नहीं की? दरअसल, पूर्व के वर्षों तक इंटरमीडिएट छात्रों की ग्यारहवीं की परीक्षा नहीं होती थी। सीधे सेंटप की परीक्षा के बाद बोर्ड की परीक्षा के लिए उनका प्रवेश पत्र आ जाता था। इस बीच संजय गांधी इंटर कालेज व इसी तरह चल रहे दर्जनों विद्यालय संचालकों को पूरा समय होता था और वे इन छात्रों को दूसरे संबंधन प्राप्त विद्यालयों से संबद्ध करा देते थे। इस बार भी कोई हंगामा खड़ा नहीं होता अगर पूर्व की भांति यह प्रक्रिया चल पाती। सूत्र बताते हैं, दूसरे विद्यालयों के सामने समस्या है कि उन्होंने अपने विद्यालय में नामांकित छात्रों की ग्यारहवीं परीक्षा का परिणाम विद्यालय को उपलध करा दिया है। अब सेंटप परीक्षा में छात्रों की संख्या कैसे बढ़ गई? इस सवाल का जवाब वे बोर्ड को क्या देंगे? बोर्ड उन्हीं छात्रों को सेंटप की परीक्षा में शामिल होने की इजाजत देगा, जिन्होंने ग्यारहवीं की परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। साथ ही बोर्ड परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र उन्हीं का निर्गत होगा जिन्होंने सेंटप की परीक्षा उत्तीर्ण की। इस बदले नियम के कारण विद्यालयों के सामने, ऐसे छात्रों के संबद्ध करने पर खुद के ही फंसने का डर सता रहा है। जिस कारण छात्र भागदौड़ कर रहे हैं और अभिभावकों से लेकर विभाग के पदाधिकारी तक चिंतित हैं।
यूं तो संजय गांधी इंटर कालेज का संबंधन वर्षों पूर्व रद्द कर दिया गया लेकिन हंगामा सत्र 10-12 के छात्रों को लेकर हैं। सवाल उठता है कि यह हंगामा पूर्व में क्यों नहीं हुआ और पदाधिकारियों ने पूर्व में इस विद्यालय की जांच-पड़ताल क्यों नहीं की? दरअसल, पूर्व के वर्षों तक इंटरमीडिएट छात्रों की ग्यारहवीं की परीक्षा नहीं होती थी। सीधे सेंटप की परीक्षा के बाद बोर्ड की परीक्षा के लिए उनका प्रवेश पत्र आ जाता था। इस बीच संजय गांधी इंटर कालेज व इसी तरह चल रहे दर्जनों विद्यालय संचालकों को पूरा समय होता था और वे इन छात्रों को दूसरे संबंधन प्राप्त विद्यालयों से संबद्ध करा देते थे। इस बार भी कोई हंगामा खड़ा नहीं होता अगर पूर्व की भांति यह प्रक्रिया चल पाती। सूत्र बताते हैं, दूसरे विद्यालयों के सामने समस्या है कि उन्होंने अपने विद्यालय में नामांकित छात्रों की ग्यारहवीं परीक्षा का परिणाम विद्यालय को उपलध करा दिया है। अब सेंटप परीक्षा में छात्रों की संख्या कैसे बढ़ गई? इस सवाल का जवाब वे बोर्ड को क्या देंगे? बोर्ड उन्हीं छात्रों को सेंटप की परीक्षा में शामिल होने की इजाजत देगा, जिन्होंने ग्यारहवीं की परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। साथ ही बोर्ड परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र उन्हीं का निर्गत होगा जिन्होंने सेंटप की परीक्षा उत्तीर्ण की। इस बदले नियम के कारण विद्यालयों के सामने, ऐसे छात्रों के संबद्ध करने पर खुद के ही फंसने का डर सता रहा है। जिस कारण छात्र भागदौड़ कर रहे हैं और अभिभावकों से लेकर विभाग के पदाधिकारी तक चिंतित हैं।
काश! पहले हुई होती पहल
यदि विभागीय पदाधिकारी इस संबंध में पहले ही सचेत हुए होते तो सैकड़ों छात्रों का भविष्य अभी दांव पर न होता। जिले में ऐसे कितने ही विद्यालय बेरोकटोक संचालित हैं जो बिना संबंधन के हैं। ऐसे विद्यालयों पर यदि विभाग द्वारा रोक नहीं लगायी जा रही तो कम से कम उनके संबंध में वांछित सूचनाएं, कागजात तो उसके पास उपलध होना ही चाहिए था। लेकिन, जिले में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की कार्यशैली का इतिहास है कि वे किसी भी मामले में जांच-पड़ताल तब करते हैं, जब मामले को लेकर बवाल हो। संजय गांधी इंटर कालेज मामले में भी पदाधिकारी की यही कार्यशैली रही है।
यदि विभागीय पदाधिकारी इस संबंध में पहले ही सचेत हुए होते तो सैकड़ों छात्रों का भविष्य अभी दांव पर न होता। जिले में ऐसे कितने ही विद्यालय बेरोकटोक संचालित हैं जो बिना संबंधन के हैं। ऐसे विद्यालयों पर यदि विभाग द्वारा रोक नहीं लगायी जा रही तो कम से कम उनके संबंध में वांछित सूचनाएं, कागजात तो उसके पास उपलध होना ही चाहिए था। लेकिन, जिले में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों की कार्यशैली का इतिहास है कि वे किसी भी मामले में जांच-पड़ताल तब करते हैं, जब मामले को लेकर बवाल हो। संजय गांधी इंटर कालेज मामले में भी पदाधिकारी की यही कार्यशैली रही है।
(उक्त खबर आज दैनिक जागरण में भी पढ़ी जा सकती है।)
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