हलो, हाय के बाद खामोशी


पिछले करीब एक पखवारे से अखबार के लोकल पन्‍नों में हमें ऐसी खबरें पढ़ने को मिल रही है। फलां जगह फलां लड़की ने फोन रिसिव किया, और जोर आवाज हुयी, लड़की बेहोश। कहीं किसी के मोबाइल पर 15 अंकों से कॉल आता है तो किसी को 16 अंकों से। कहा जा रहा है कि ऐसे नंबरों से कॉल आने पर आदमी को करंट लगता है और वह बेहोश हो जाता है। एक खबर में बताया गया था कि उसके मोबाइल में जो नंबर डिस्‍प्‍ले किया था उसमें से 5 नंबर हरे और 5 लाल रंग के थे। ऐसे नंबरों को रिसिव करने पर शामत है। एक अन्‍य खबर के मुताबिक एक लड़की ने फोन रि‍सीव भी नहीं किया। उसके मोबाइल पर कोई मैसेज आया था जब उसने मैसेज खोला तो मोबाइल में जोर से वाइव्रेशन हुआ और वह झटका खाकर बेहोश हो गयी। स्थिति यह है कि अखबार में रोज ऐसी एकाध खबरें अवश्‍य रहती हैं। इन खबरों में न तो कोई आधिकारिक पुष्‍टी रहती है और न ही इसका कोई स्‍पष्‍ट कारण बताया जाता है। ये खबरें कम, अफवाहें अधिक लगती हैं। इस कारण मोबाइल धारकों में अजीब बेचैनी है। बिहार के सारण जिले में यह संकट कुछ ज्‍यादा ही है। लेकिन, खबरें पूरी तरह निराधार भी नहीं मानी जा सकती। क्‍योंकि खबरों में कुछ और हो या न हो, पीडि़त मोबाइल धारकों के बयान अवश्‍य देखने को मिल रहे हैं। जिसमें वह खुद स्‍वीकार करता है कि उसने जब कॉल रिसीव किया तो उसे बिजली जैसी कुछ करंट लगी और वह बेहोश हो गया। कारण चाहे जो हो, लेकिन इस संबंध में न तो प्रशासन कोई पहल कर रहा है और न ही सरकार। रोज एकाध लोगों के बेहोश होने की खबरों से अन्‍य लोगों का क्‍या हाल है, यह तो हमें नहीं पता पर हमारा बुरा हाल है। जब भी हमारा मोबाइल बजता है, रिसीव करने में डर लगता है। एक खबर तो और भी डराने वाली थी। इसमें बताया गया था कि एक महिला ने जब फोन रिसीव किया तो उसके साथ उसका एक बेटा और बेटी भी थी। तीनों एक साथ बेहोश हो गए। एक खबर तो मेन पृष्‍ठ पर ही प्रकाशित हुई थी जिसके मुताबिक एक व्‍यक्ति अपनी भैस चराने गया था। वहां उसका मोबाइल फट गया और उसकी मौत हो गयी। उसके कान के पास जले के निशान और मोबाइल की फटी बैट्री, बिखरे मोबाइल के पुर्जों से यह अंदाजा लगाया गया कि उसकी मौत मोबाइल विस्‍फोट के कारण ही हुई है। यदि यह सब खबरें सत्‍य हैं, तो फिर सरकार इस बारे में अब तक चुप क्‍यों है, यह समझ से परे है। और यदि, सारीं खबरें यूं ही हैं, तो प्रकाशित क्‍यों हो रही हैं। सरकार को शीघ्र ही इसके कारणों का पता लगाना चाहिए। साथ ही मोबाइल कंपनियों पर भी नकेल कसना चाहिए। यदि केवल कॉल रिसीव करने से ही आदमी बेहोश हो जाए, तो यह एक गंभीर बात है। यही नहीं, यदि ऐसा सचमुच हो रहा है तो फिर किसी दिन कोई सरकार भी बेहोश हो सकती है। मुख्‍यमंत्री, प्रधानमंत्री कोई भी तो इसका शिकार हो सकता है। या, सिर्फ आम आदमी के मोबाइल ही लोगों को बेहोश करते हैं। क्‍या कारण है कि ऐसी खबरें जहां से भी आ रही हैं, जिन लोगों के साथ घटनाएं हो रही हैं, वे छोटे तबके से संबंधित हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि कम दाम के मोबाइल में ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं। कारण चाहे जो हो, हमारी सरकार से प्रार्थना है कि शीघ्र इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वरना, हलो... हाय के बाद की खामोशी ठीक बात नहीं है।

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