उसकी हवस से हार गया पति का प्रेम
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| ताड़ना की अधिकारी कामिनी (काल्पनिक) |
गोस्वामी तुलसीदास की इन दो लाइनों पर अक्सर विवाद होता रहता है- ढोल गवार शुद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी। आप पूछेंगे- अभी तो कोई विवाद नहीं? फिर, अभी इस पर चर्चा की क्या आवश्यकता? आपके मन में सहज ही उत्पन्न इस प्रश्न का जवाब हमारे पास है लेकिन हम चाहेंगे कि इसके पहले आपको एक ताजा घटना की जानकारी दे दें। शायद, इसके बाद हमें तुलसीदास के उपरोक्त पंक्तियों का निहितार्थ समझाने की आवश्यकता ही न पड़े...?
बिहार के सारण जिले में परसा थाना क्षेत्र में एक छोटा सा गांव है- माड़र। माड़र गांव के कई घरों में एक घर रमेश राय (काल्पनिक) का भी है। रमेश की शादी आज से 10 साल पूर्व एक सुंदर युवती से हुई थी। शादी के बाद से रमेश ने अपनी पत्नी को वही हक दिया जो कि एक पत्नी को मिलना चाहिए। इस बीच रमेश को तीन संतानें भी हुईं। रमेश साधारण घर का साधारण व्यक्ति होने के बाद भी अपनी पत्नी की जरूरतें व भावनाऍं समझने के लिए हमेशा एक पति ही बना रहा, कभी मजबूर मध्यमवर्गीय पुरुष नहीं बना। प्रेम की यह एकतरफा कहानी आगे बढ़ती गयी और इस दौरान एक दशक गुजर गया लेकिन पति रमेश यही समझता रहा कि उसे जो कुछ भी मिल रहा है वह उसकी पत्नी का प्रेम है, धोखा नहीं। हकीकत कुछ और ही थी, जिसका खुलासा पूरे 10 साल गुजर जाने के बाद हुआ और जब खुलासा हुआ तो रमेश के पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गयी।
इसी महीने 04 जुलाई की ही तो बात है। रमेश संध्या में खा-पीकर पास के गॉंव में कीर्तन सुनने चला गया। पत्नी कामिनी (काल्पनिक) भी खा-पीकर सो गयी होगी- ऐसा उसने सोचा था और उसकी नींद में खलल न पड़े, इसलिए सुबह ही लौटने का सोचा था। लेकिन, इसी बीच उसके सिर में तेज दर्द होने लगा और दवा के लिए वह घर लौटने को विवश हो गया। आधी रात को घर पहुँच उसने अपने घर का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा नहीं खुला। उसने और तेज खटखटाया। फिर भी दरवाजा नहीं खुला। पत्नी-प्रेम में अभिभूत पति को लगा कि कहीं पत्नी की तबीयत तो नहीं खराब हो गई? वह चिंतित हो उठा और जोर-जोर से कामिनी की आवाज लगाते हुए दरवाजा खटखटाने लगा। आस-पास के लोग भी जग गए। करीब 10-15 मिनट बाद कामिनी ने दरवाजा खोला था तो रमेश ने देर से दरवाजा खोलने का कारण पूछने की बजाय उसका हाल-चाल ही पूछा था। जब वह निश्चिंत हो गया कि कामिनी ठीक है तब वह अपने सिरदर्द की दवा ढूंढने लगा। घर की बिजली गुल होने के कारण वह टॉर्च जलाकर इधर-उधर दवा ढूंढ रहा था। इसी क्रम में उसने पलंग के नीचे जब टॉर्च जलाई तो एकबारगी वह उछल ही गया। उसे अपनी ही ऑंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। अपने शक को दूर करने के लिए जब उसने अपनी पत्नी पर नजर गड़ाई तो उसका शक दूर होने की बजाय, हकीकत में बदल गया और फिर तो उसके दिल में आग ही लग गयी। पलंग के नीचे एक नंग-धड़ंग युवक छुपा हुआ था। माजरा समझने के लिए अधिक दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं थी। दरवाजा देर से खुलने का कारण भी रमेश समझ चुका था। उसने उस युवक को बाहर खींचकर निकाला। दरवाजा पीटे जाने से पहले ही जग चुके आस-पास के लोगों ने जब हल्ला-गुल्ला सुना तो वे अपने घर से बाहर निकल रमेश के घर के सामने एकत्र हो गए। देखा तो रमेश एक नंगे व्यक्ति को पीटे जा रहा था और उसकी पत्नी उसका बचाव कर रही थी। लोग भी माजरा समझ चुके थे और आक्रोश को अंदर ही दबाकर पहले उस निर्वस्त्र व्यक्ति को उसके कपड़े दिए और फिर पुलिस को खबर की। लोगों को डर था कि कहीं पत्नी की बेवफाई से हतप्रभ रमेश उस युवक की जान ही न ले ले और खुद कानून की पकड़ में आ जाए। मौके पर पहुँची पुलिस ने युवक और बेवफा स्त्री को गिरफ़तार कर लिया और थाने ले गई। युवक की पहचान सारण जिले के ही सोनपुर थाना क्षेत्र के बबुरबानी ग्राम निवासी ऋषिकेश राय के रूप में की गई। थाने में जो राज-फाश हुए उससे तो रमेश की नजर में पतिव्रता उसकी स्त्री और भी बदचलन होती चली गयी। मालूम हुआ कि रमेश की शादी के पहले से ही उसकी पत्नी से ऋषिकेश के अवैध संबंध थे। कामिनी की बेवफाई व बेहयाई की हद कि उसने थाने में पुलिस से भी यही कहा कि उसे ऋषिकेश के साथ रहना है न कि पति रमेश के साथ।
अब उस ऋषिकेश का चरित्र भी जान लें, जिसकी खातिर कामिनी ने अपने भोले-भाले और बेहद चाहने वाले पति के साथ बेवफाई की। आम तौर पर स्त्री की बेवफाई को पति की कमजोरी बताने वाले पुरुषों या महिलाओं की जुबान पर ऋषिकेश का चरित्र व उसकी कारगुजारी जानने के बाद स्वाभाविक रूप से ताला लग जाएगा।ऋषिकेश की शादी वर्ष 2002 में ही हुई थी। उसकी खराब आदतों व पारिवारिक कलह से तंग आकर उसकी पत्नी ने कुछ ही वर्षों बाद जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद इसी वर्ष उसने 2 जुलाई को हरिहरनाथ मंदिर में एक युवती से पुन: शादी रचाई। उसकी पहली स्त्री की आत्महत्या व दूसरी शादी- दोनों बातों की खबर कामिनी को थी, बावजूद वह ऋषिकेश की बाहों में पनाह लेती रही। वजह... ? 03 जुलाई को अपनी नई-नवेली दुल्हन के साथ सुहागरात मनाने वाले ऋषिकेश को अगली ही रात कामिनी ने खुद को परोस दिया। इस संबंध में भी यह बात गौर करने वाली है कि जिस रात ऋषिकेश और कामिनी को रमेश ने पकड़ा, उस रात्रि कामिनी ने ही ऋषिकेश को फोन कर बुलाया था।
इस घटना के सारे घटनाक्रम हमने आपके समक्ष रख दिए हैं, अब बारी आपके कुछ कहने की है। इस घटना पर भी और तुलसीदास की इन लाइनों पर भी- ढोल गवार शुद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी...।

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