इस महापाप की सजा क्‍या... ?


जिस घटना का जिक्र हम आगे करने जा रहे हैं, दावा है जो सारणवासी अपने सारण पर गर्व करते हैं, निश्चित ही शर्म की हद तक शर्म करने पर विवश हो जाएंगे। साथ ही उनके जिगर में एक ऐसे सारणवासी के प्रति हत्‍या की हद तक आक्रोश पनप जाएगा जिसने न सिर्फ सारण को कलंकित किया बल्कि एक ऐसे रिश्‍ते का खून किया जब पर अविश्‍वास करना ही पाप करना है। इस घटना ने हमें इतना उद्वेलित किया कि जिक्र करना ही पडा। आप भी रूबरू होइए भारतीय संस्‍कृति पर दाग के धब्‍बे देने वाले इस घटनाक्रम से...।
01 मई की ही बात है। सारण के मकेर थाना क्षेत्र के मछही जमालपुर के चंवर से एक युवक का शव पुलिस ने बरामद किया। युवक की हत्‍या चाकुओं से गोदकर की गयी थी और फिर उसे यहां फेंक दिया गया था- यह तो पला चल रहा था लेकिन पुलिस यह पता नहीं कर पा रही थी कि उसकी हत्‍या किसने की, क्‍यों की और वह कौन है... ? परंतु पुलिस ने प्रयास भी नहीं छोड़ा। मढ़ौरा के तेज-तर्रार डीएसपी के नेतृत्‍व में पुलिस मामले के उदद्भेदन में लगी रही। चंवर के आसपास के कुछ चरवाहों ने पुलिस को बताया कि दो मोटरसाइकिलों पर चार लोग आए थे और शव को यहां फेंक गए थे।चरवाहों ने एक अपराधी को दीपक नाम से पुकारे जाने की बात भी पुलिस को बताई। इतनी जानकारी मिलने के बाद पुलिस दीपक नामक शख्‍स की खोज में जुट गयी। दीपक का पता चला और मकेर थानाध्यक्ष राजरूप राय ने वैशाली थाना के दाउदनगर स्थित एक ईट भट्ठा से दो दिनों पूर्व 06 जून को उसे गिरतार कर लिया। दीपक की गिरतारी के बाद जो मामला सामने आया उससे समाज के मजबूत रिश्ते भी दरकते नजर आए। दीपक ने बताया कि जो लाश मिली थी वह सरैया, मुजफरपुर के अजीतपुर निवासी राहुल कुमार की थी। राहुल रिश्ते में उसका सगा मामा था। यह तो हुई एक भांजे द्वारा एक मामा की हत्‍या किए जाने का मामला। आगे आप जो जानेंगे उससे आपके पैरों तले की जमीन खीसक जाएगी। दीपक की तीन मामा में सबसे बड़े मामा का नाम है रीतेश। रीतेश की पत्‍नी का नाम है रिंकू और दीपक के नाना हैं शंकर सिंह। पिछले दिनों जब राहुल का मझला मामा राहुल छुट्टी में घर आया तो उसने जो कुछ देखा उससे एक पिता और पुत्र के रिश्‍ते में दरार आ गई। उसने अपने पिता को अपनी भाभी रिंकू के साथ हमबिस्‍तर होते देख लिया था। इसके बाद उसकी अपनी भाभी और अपने पिता से काफी झगड़ा हुआ था। बात अन्‍य बेटों तक न पहुंच जाए इस खातिर हवस के भूखे पिता ने पुत्र की ही हत्‍या की साजिश हवश की भूखी पुत्रवधू के साथ मिल रच दी और इसमें दीपक को भी शामिल कर लिया जो किसी और लड़की से प्‍यार करता था और शादी न होने के कारण अपनी प्रेमिका के भाई और पिता को फंसाना चाहता था। उसे भी एक जरिया मिल गया कि इसी हत्‍या में वह उन्‍हें फंसा कर अपना बदला साध लेगा। इस हत्‍या के लिए पतोहू, पत्‍नी नामक रिश्‍ते को कलंकित करने वाली कलंकिनी रिंकू समस्तीपुर से अपने भाई चंदन कुमार को भी बुला लिया। दीपक ने अपने गांव के राकेश कुमार के साथ मिलकर राहुल को शराब के साथ विषैली दवा मिलाकर पिला दी। दोनों राहुल को बेहोशी की स्थिति में मोटरसाइकिल पर बैठाकर रेवा नदी पुल पर ले आये लेकिन नदी में फेंकने का मौका नहीं मिलने के कारण वे आगे बढ़ गए और मछही जलालपुर के पास चाकुओं से गोदकर उसे मार डाला। इसके बाद लाश को सड़क के किनारे फेंक कर भाग गए।
कहां जाता है कि पाप छुपता नहीं। फिर यह पाप कैसे छुप जाता ? पुलिस ने मामले का पर्दाफाश कर हवस के भेडि़ए को गिरफ़तार कर लिया है लेकिन हमारी समझ में इस महापाप की सजा उसे परलोक में भी अवश्‍य मिलेगी....। कानून तो सिर्फ हत्‍या की ही बात समझेगा, लेकिन खून तो उसने रिश्‍ते का भी किया है? फिर, उस महापाप की सजा उसे क्‍या नहीं मिलनी चाहिए...? ऐसी स्थिति उत्‍पन्‍न करने के लिए, जिससे कि एक पुत्र का पिता से विश्‍वास उठ जाए, एक बहूं का अपने ससुर से विश्‍वास उठ जाए, एक वृदद्ध से समाज का विश्‍वास उठ जाए..., क्‍या उसे अलग से सजा की आवश्‍यकता नहीं है? हमें तो व्‍यक्तिगत रूप से लगता है कि उसकी सजा किसी बलात्‍कारी से अधिक कठोर होनी चाहिए, किसी हत्‍यारे से अधिक कठोर होनी चाहिए और किसी मनुष्‍य को दी जाने वाली सजा से भी अलग सजा दी जानी चाहिए क्‍योंकि हमारी नजर में वह मनुष्‍य है ही नहीं। आप क्‍या कहते हैं.... ?

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