पोर्निस्तान : यह बंद तालों का असर लगता है
बचपन में बुजुर्गों से एक बात जानी थी। यदि किसी चीज के प्रति लोगों के मन आशंका और उत्सुकता पैदा करनी हो तो बस कुछ मत करो, उस चीज को उन लोगों के सामने ही उनकी नजरों से बचाना शुरू कर दो। यानी, कुछ इस तरह कि लोगों को यह पता भी चले कि इस चीज को उनकी नजर से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। फिर देखना, वे इसे देखने के लिए, इसकी तह तक जाने के लिए कैसे कुलबुलाते हैं, कितनी हदें पार करते हैं। एक खाली बाक्स में भी ताला लगाकर उसे चोरों की नजर में लाया जा सकता है। वैसे, तो कईयों बार बचपन में सुनी यह बात सच साबित हुयी है लेकिन एक बार फिर हमने इसे खरा पाया है। पाकिस्तान के पोर्निस्तान बनने के मामले में हमें लगता है यह भी एक कारण है। हो सकता है कि आपमें से कई पोर्निस्तान नाम से परिचित न हो। दरअसल, सर्च इंजन गुगल के एक सर्वे के अनुसार पाकिस्तानी इंटरनेट पर पोर्न साइट देखने में दुनियां में अव्वल हैं। इसी के आधार पर पाकिस्तान को पोर्निस्तान कहा जाने लगा है। अब तो पोर्निस्तान नामकरण के पीछे का मतलब समझ में आ गया? लेकिन जरा सोचिए कि जिस देश में बुर्का की प्रथा को जारी रखने के लिए मुल्ला टकराते रहते हों, सरकार इसकी पैरवी करती हो, इसको जारी रखने के लिए धर्म ग्रंथों को बीच में लाया जाता रहा हो, उस देश का नाता पोर्न साइटों से कैसे जुड़ गया? हमें तो यह वही बंद तालों का असर लगता है। यानी, देश के लोगों को इन सब चीजों से जितना ही अधिक दूर करने का प्रयास किया गया, उनकी इनसबके प्रति उत्सुकता, चाहत उतनी ही अधिक बढ़ती चली गयी। एक उदाहरण दे रहा हूं। अपने घर में दो बॉक्स लेकर आइए, एक बॉक्स में ढ़ेर सारी चीजें रख दीजिए लेकिन ताला न लगाइए और एक बॉक्स में कुछ भी भर दीजिए पर ताला लगाना न भूलिए। हमारा दावा है कि आपके अलावा हर शख्स उस बंद ताले वाले बॉक्स पर ही अपनी नजर गड़ाएगा। और चोर तो सबसे पहले उसे ही लेकर भागेंगे। बस यही पाकिस्तान में हुआ है। गुगल के मुताबिक विश्व में पोर्न सामग्री देखने में पाकिस्तान के लोग सबको पीछे छोड़ दिए हैं। हालांकि गुगल की इस रिपोर्ट को झुठलाने के लिए एक बार फिर वे ही लोग जो कि ऐसी रिपोर्टों के निर्माण के लिए जिम्मेवार है, कोशिश में लग गये हैं। पाकिस्तान को पोर्निस्तान कहा जाना यहां के धर्मगुरुओं, नेताओं के गले नहीं उतर रहा और वे इसका लगातार खंडन कर रहे हैं। गुगल की सर्वे रिपोर्ट को झुठलाने की पूरी कोशिश की जा रही है- इसके समानांतर मगर विपरीत तर्क देकर, तथ्य देकर। हो सकता है कि इसके लिए पाकिस्तान सरकार कोई दूसरा सर्वे करा डाले और उसमें अपने देश के लोगों को धर्म चैनल देखने में नंबर वन बना दे। यहां के अखबार 'डॉन' ने इस्लामाबाद, लाहौर, कराची, पेशावर और क्वेटा के लोगों से बातचीत कर यह निष्कर्ष दिया है कि गुगल की रिपोर्ट सत्य नहीं है। पाकिस्तान की इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन भी अपने देश के बचाव में उतर आई है। उसने कहा है कि पाकिस्तानियों द्वारा देखी जाने वाली शीर्ष 40 साइटों में एक भी पोर्न वेबसाइट नहीं है। संस्था के प्रवक्ता वहाज-उस-सिरास ने कहा है- 'दुनिया भर में करीब डेढ़ से दो अरब लोग इंटरनेट पर सर्च करते हैं। उनमें से हमारे देश में इंटरनेट के उपभोक्ता महज 50 से 80 लाख हैं। जो कि पूरी दुनिया के उपभोक्ताओं का केवल 0.5 फीसदी है। पाकिस्तान की जनसंख्या के पांच प्रतिशत लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में देश पोर्न सामग्री देखने के मामले में कैसे अव्वल हो सकता है?' फिलहाल, यहां की सरकार और धर्म गुरु चाहे जितना भी हल्ला कर ले लेकिन आम पाकिस्तानी पाकिस्तान को पोर्निस्तान कहने पर कुछ अलग सोच नहीं रखते। जो पाकिस्तान के एक अखबार डॉन में छपे उनके बयानों से स्पष्ट होता है। डॉन में एक उम्रदराज मुल्ला ने कहा है- 'हां, मैं पोर्न साइट देखता हूं। हो सकता है गूगल का सर्वे सही हो। वैसे इसमें हर्ज क्या है? अगर पोर्न साइट बनाई जाती हैं, तो जाहिर सी बात है, लोगों के देखने के लिए।' एक पाकिस्तानी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, 'मुझे समझ नहीं आता कि क्यों पाकिस्तान के लोग सच्चाई स्वीकारने में संकोच कर रहे हैं? इन लोगों को यह मानने में शर्म क्यों महसूस हो रही है।' पोर्न सामग्रियों को देखने में देश को मिले खिताब पर इसी देश के नागरिकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं, लेकिन हमारा तो बस इतना ही कहना है कि जब धुआं उठा है तो कहीं न कहीं आग तो होगी ही। ना सही कि गुगल की रिपोर्ट पूरी तरह सत्य व निर्विवाद है, लेकिन इससे भी तो इनकार नहीं किया जा सकता कि रिपोर्ट में कुछ न कुछ सच्चाई अवश्य है। ना सही कि पाकिस्तान की जनसंख्या बहुत अधिक है लेकिन जितनी है उसमें उतने अधिक लोगों का पोर्न साइटों पर अपनी आंखें जमाना आश्चर्यजनक तो है ही। बताते हैं कि पाकिस्तान में इंटरनेट के मात्र 50 से 80 लाख तक ही उपभोक्ता हैं लेकिन यदि इतने उपभोक्ताओं में से ही अधिकतर पोर्न सामग्रियां देख रहे हों तो आखिर ऐसी रिपोर्ट क्यों नहीं आएगी। बहरहाल, ऐसी रिपोर्ट आगे न आए और ऐसी चीजों में देश का नाम फिर ना उछले इसके लिए रिपोर्ट के पीछे के कारणों पर सरकार को भी और पाकिस्तान के धर्म गुरुओं को भी सोचना होगा। हमारी सोच में तो यह बंद तालों का असर लगता है...।
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