प्रसुन्न के शहादत को शासन-प्रशासन का कोरा सलाम


देश का वातावरण इस समय कुछ अशांत-अशांत-सा है। राजनीतिज्ञों में बयान देने की होड़-सी मची है कि भारत पीठ में छुरा भोकने वाले को कभी माफ नहीं करेगा। भारतीय सेना के दो जवानों का सिर काट लेने वाले पाकिस्तान पर बरसने वाली देश की सत्ता क्या यह बताएगी कि राष्ट्र की रक्षा करते हुए बलिदान हो जाने वाले देशभक्तों के साथ उसका क्या कर्तव्य है, और वह उसे किस हद तक निभाती है? घोटालों की रिकार्ड बनाने वाली यह बेहाया सरकार जवानों की नृशंस हत्या  देश के स्वाभिमान को लेकर कितनी गंभीर है, इतना समझने का अनुभव तो भारत के नागरिकों में है ही। बयानों के माध्यम से देश के शहीद सपूतों की चिंता करने वाली सत्ता, उनके लिए वाकई कितनी फिक्रमंद है, यह तो उनकी शहादत के बाद उनके परिवारों की हालत से खुद ही बयां हो जाता है। आइए, देश की रक्षा में अपना प्राण न्योछावर करने वाले सारण के सपूत की कहानी बताते हैं, आप खुद फैसला करें कि ऐसी सरकारें देश व मान बढ़ाती हैं या उसका स्वाभिमान बेचती हैं। वैसे, शहीदों का परिवार शहीदों के कफन तक का सौदा करने वाली सरकार से कोई उम्मीद भी नहीं रखता। उसे तो गर्व है कि एक बेटा माॅ की रक्षा में कुर्बान हो गया।
सारण के सपूत व बीएसएफ-94 बटालियन के जाबांज जवान प्रसुन्न कुमार मिश्रा की शहादत पर उसकी मां, पिता व भाई ही नहीं, पूरे इलाके को गर्व है। गर्व तो शासन व प्रशासन को भी है लेकिन देश के इस अमर जाबांज की शहादत के बाद उसके परिवार की हालत बताती है कि शासन-प्रशासन का गर्व सिर्फ बातुनी है। देश के लिए दुश्मनों की गोली अपने सीने पर झेलकर शहीद हुए अमर सपूत प्रसुन्न की बहादुरी की प्रशंसा करने जिला प्रशासन के अधिकारियों से लेकर बिहार सरकार के तमाम मंत्री व विधायक पहुंचे परंतु प्रसुन्न के परिवार को इनका कोरा आश्वासन तो अमर प्रसुन्न को इनका कोरा सलाम मिला। हां, साथी जवानों ने पूरा फर्ज निभाया और अपने जाबांज साथी के पुण्य शरीर के पंचतत्व में विलीन होने के बाद ही यहां से रूखसत हुए। सेना से भी जो सहयोग मिलना था, प्राप्त हो गया परंतु सरकार....।
सारण के सदर प्रखंड की डुमरी पंचायत के डुमरी अड्डा निवासी किसान राजीव नारायण मिश्रा के प्रथम पुत्र प्रसुन्न कुमार मिश्रा ने स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद 15 मार्च 2007 को सेना में शामिल हुए। किशनगंज में उनका चयन हुआ और पहली बार हजारीबाग में उनकी तैनाती हुई। उन्होंने गुड़गांव स्थित ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग ली थी। कुछ दिनों तक वे कलकत्ता में भी तैनात रहे। इसके बाद उनकी तैनाती सेना ने जममू में कर दी। इसी बीच 19 नवंबर 2011 को उनकी शादी रानी से हुई। शादी के बाद वे पुनः जममू चले गए। दोस्ती के पीछे पीठ में छुरा भोकने के आदी हो चुके पाकिस्तान के सैनिकों ने अचानक हमला बोला। प्रसुन्न समेत उनके साथियों ने गोलियों का जवाब गोलियों से दिया लेकिन इसी दौरान प्रसुन्न के सिर में एक गोली लगी और वे वहीं गिर पड़े। यह घटना 11 जून 2012 को घटित हुई और स्थान था जममू का कृष्णा घाटी। साथियों ने तुरंत उधमपुर कमांड हास्पिटल में घायल प्रसुन्न को भर्ती कराया। जहां दो दिनों तक मौत से लड़ने के बाद 13 जून को यह सपूत शहीद हो गया। 15 जून को साथी जवान उनके शव को लेकर उनके ंघर आए। गंगा किनारे सिंगही घाट पर 24 वर्षीय अमर सपूत को साथी जवानों समेत हजारों की संख्या में मौजूद गांव वालों ने अश्रुमिश्रित विदाई दी। 
प्रसुन्न की शहादत की खबर के बाद स्थानीय राजनीतिज्ञों व प्रशासन के लोगों का आना-जाना शुरू हुआ। आंखों में आंसू भरे पिता राजीव नारायण मिश्रा बताते हैं कि भाजपा के राष्टीय प्रवक्ता। राजीव प्रताप रूड़ी, विधायक ज्ञानचंद मांझी, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल सभी आए और तमाम तरह के आश्वासन देकर गए। इनमें से कोई भी दुबारा हाल-चाल जानने नहीं आया। प्रशासन की ओर से एसडीओ विनय कुमार पाण्डेय भी आए लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। 
बता दें कि प्रसुन्न अपने घर के एकमात्र कमाउ सदस्य थे। पिता खेती-बारी करते हैं जबकि छोटा भाई अभी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। पिता को सरकार व प्रशासन से सहयोग की अधिक उममीद नहीं लेकिन वे इस बात से मर्माहत हैं कि अब न तो उनके बेटे की शहादत की चर्चा होती है और न हीं उनसे सरकारी नुमाइंदे कभी भेंट कर हाल-चाल जानने की भी कोशिश करते हैं। वे लगभग रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं कि पाकिस्तानियों ने चाहे उनके बेटे के साथ जो भी किया, लेकिन भारत के बेटे के साथ भारत के ही नेता व अधिकारी क्या कर रहे हैं? उसकी शहादत के बाद कोई पूछने वाला तक नहीं। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। सरकार चाहे कुछ करे या न करे, उनके बेटे ने भारत के सपूत होने का परिचय दे दिया है। गांव के लोगों से उन्हें एक जाबांज बेटे के पिता होने का पूरा सममान मिलता है, वे इसी से संतोष कर जाते हैं परंतु उनकी बहूं से तो उसका सबकुछ छिन गया? उनका बेटा देश के लिए खुद को न्योछावर कर दिया, लेकिन इस प्रदेश व देश की सरकार उनके बेटे व उसके परिवार के लिए क्या कर रही है?

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