बिहार या सारण के मंत्री...?
बहुमत के नए रिकार्ड बनाने के बाद सूबे में सत्ता की दूसरी पारी खेल रही नीतीश सरकार के मंत्रियों का क्षेत्र-मोह सर्वांगीण विकास के दावे और प्रयास को कही चूना न लगा दे। यहां बात हो रही है सारण प्रमंडल के तीन जिलों- छपरा, सीवान और गोपालगज के विस क्षेत्रों से जीतकर विधायक और फिर मंत्री बनने वाले दो नेताओं की। तीनों जिलों से यही दो मंत्री हैं जिनपर यहां के लोगों की उम्मीदें हैं लेकिन मंत्री होने के नाते उन्हें पूरे सूबे के लोगों की उम्मीदों को भी नहीं भूलना चाहिए। मांझी विस क्षेत्र से जदयू के गौतम सिंह लगातार दूसरी बार मंत्री बने हैं, हालांकि विभाग इस बार बदल गया है। पहले उद्योग मंत्री थे और अब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मालिक हैं। छपरा विधानसभा से विजयी भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल भी दूसरी बार मंत्री बने हैं। इनका भी विभाग बदल गया है। पहले युवा, खेल, संस्कृति विभाग की देखरेख इनके जिम्मे थी, इस बार श्रम संसाधन विभाग की बागडोर संभाल रहे हैं। लेकिन दोनों ही मंत्री बनने के बाद लगातार अपने ही क्षेत्र में देखे जा रहे हैं।
याद दिला दें कि मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद नीतीश ने अपने मंत्रियों को हिदायत दी थी कि वे इस बार अपने अभिनंदन-समारोहों के मोह छोड़ अपने विभागीय कार्य में अभी से लग जायें। नीतीश के इस बयान को अखबारों ने पहले पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित किया और जनता ने भी सरकार के इस वक्तव्य का हार्दिक स्वागत किया। लोगों को उम्मीद थी कि अब विकास की गति पहले से दोगुनी हो जाएगी। नीतीश के बयान से भी ऐसा ही लगा था। उन्होंने कहा था कि उनके पास समय बिल्कुल भी नहीं। पांच वर्षों का समय बहुत कम है और काम बहुत अधिक। उन्होंने खुद तो अपने बयान पर खरा उतरकर भी दिखाया। शपथ के बाद ही विभागों की बैठक कर डाली। लेकिन, लगता है कि नीतीश के मंत्रियों को यह सब रास नहीं आया। वे अब भी अपने अभिनंदन-समारोहों और क्षेत्र के मोह से बंधे पड़े हैं। तभी तो सूबे के ये दोनों मंत्री लगातार अपने ही क्षेत्र में देखे जा रहे हैं। जहां तक जनार्दन सिंह सिग्रीवाल की बात है तो वे अभिनंदन समारोहों के पुराने प्रेमी हैं। जनाब जब पिछली बार युवा खेल एवं संस्कृति विभाग के मंत्री बने थे तब करीब डेढ़ वर्षों तक सारण में अभिनंदन समारोहों में शिरकत करते रहे। हद तो तब हो गयी जब पटना पश्चिमी के भाजपा विधायक नवीन किशोर सिन्हा का दाह-संस्कार था और उस दिन मंत्री जी अपने गृह क्षेत्र में एक अभिनंदन-समारोह में खुशियां मनाते नजर आए थे। जब यह खबर यहां के एक अखबार में छपी तब मंत्री जी भड़क उठे थे, हालांकि इसके बाद उनके अभिनंदन समारोह होने बंद हो गए थे। उस समय स्थानीय लोगों में चर्चा थी कि विधायक जी पहली बार मंत्री बने हैं तो अभिनंदन का लुत्फ ले रहे हैं, लेकिन इस बार भी मंत्री जी का अभिनंदन- समारोहों से मोह भंग होता नजर नहीं आ रहा। हां, इस बार समारोहों की संख्या पिछली बार की तुलना में बहुत कम रही। साथ ही समारोहों की भव्यता भी जाती रही है। समारोहों से इतर एक बात और है जो सूबे के अन्य विस क्षेत्रों की जनता को दुखी करने वाली है। वह यह कि विभाग के मंत्री लगातार छपरा में ही देखे जा रहे हैं। छपरा शहर के लोगों के बीच व्याप्त चर्चाओं की मानें तो सिग्रीवाल जी अपने इसी खासियत के लिए लोगों के बीच जाने भी जाते हैं। विकास की बहुत अधिक उम्मीद लोगों ने उनसे नहीं रखी है। हां, स्थानीय लोगों से उनका जुड़ाव ही उन्हें जिताने में अधिक कारगर रहा है। इसका ताजा उदाहरण है छपरा शहर में आयोजित राजेन्द्र जयंती समारोह। पिछले हफ़ते आयोजित इस समारोह में जब मंत्री सिग्रीवाल पहुंचे तो उन्हें सभी बुजुर्गों के चरणस्पर्श कर आशीर्वाद लिया और युवाओं के पास स्वयं जाकर उनसे हाथ मिलाया। भला जब स्वयं मंत्री जनता के पास पहुंच उसका पैर छूता हो, हाथ मिलाता हो तो उसे और कुछ याद ही कहा रह जाता है? समारोह के दौरान ही लोग कहते सुने गए कि सिग्रीवाल जी की यही तो खासियत है...। लेकिन, मंत्री जी को यह समझना चाहिए कि विधायक वे अवश्य ही छपरा के लोगों के चलते ही बने हैं लेकिन मंत्री बनने के बाद उनके कर्तव्य का दायरा विस्त़ृत है और उन्हें किसी क्षेत्र में सिमटकर नहीं रहना चाहिए। अब बात करते हैं सारण से दूसरे मंत्री जदयू के गौतम सिंह की। श्री सिंह भी लगातार दूसरी बार मंत्री बने हैं। ये भी अपने गृह जिले में ही अधिकतर नजर आ रहे हैं। हालांकि, श्री सिग्रीवाल की तुलना में इनके कार्य भी नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके, दोनों मंत्रियों के लगातार सारण में बने रहना चर्चा का विषय है। लोगों में इस बात की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं कि नीतीश ने इन दोनों विधायकों को बिहार का मंत्री बनाया है या फिर सारण का...?
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