विकास (सुशासन) की पोल खोलता एक पुल
बिहार में इस समय विकास की बयार बह रही है। नये पुल-पुलियों के निर्माण और पुराने सड़कों को रंग-पोत कर चकाचक बनाने में नित्य नये रिकार्ड कायम हो रहे हैं- ऐसी खूब चर्चा है। लेकिन वास्तविकता यह भी है कि कुछ ऐसे भी राह हैं जो खतरों से खाली नहीं। इन रास्तों पर चलते हुए राहगीर मंजिल पायें या नहीं, लेकिन मौत को कभी भी पहुंच सकते हैं। यमलोक की याद दिलाने वाली इन राहों और पुल-पुलियों पर अब तक या तो विकास वाली सरकार, प्रशासन का ध्यान नहीं है या फिर नजरअंदाज करने की पुरानी आदत अभी गयी नहीं है।
बिहार में सारण प्रमंडल के छपरा, सीवान और गोपालगंज जिलों के कई प्रमुख मार्गों की स्थिति अब भी ऐसी है कि उन पर चलने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कुछ मार्गों पर पुल-पुलियों की कुछ ऐसी दशा है कि इन पर चलने वालों के ठंड के इस मौसम में भी पसीने निकल आये। ऐसे पुल-पुलियों में एक पुलिया सारण जिले के एकमा-चैनपुर मुख्य मार्ग पर है। इस मार्ग पर स्थित बोहटा पुल की रेलिंग पूरी तरह टूट चुकी है और नदी की गहराई राहगीरों को अपनी तरफ खींचती प्रतीत होती है। पैदलयात्रियों और वाहन चालकों के लिए खतरों का पर्याय बने इस पुल पर अब तक किसी पदाधिकारी-नेता का ध्यान नहीं गया है। इस समय सूबे में यहां से दो मंत्री है- जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और गौतम सिंह। दोनों ही इस समय लगातार जिला के विभिन्न प्रखंडों स्थित पंचायतों-गांवों में घूमकर लोगों को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं व अभिनंदन समारोहों में भागीदार बन रहे हैं। लेकिन, इसका क्या कहें कि इनका भी ध्यान इस तरफ नहीं गया। बहरहाल, विकास की पोल खोलने के लिए यह पुल एक अच्छा उदाहरण है।

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