हर बार पुलिस की तरह देर से क्यों पहुंचते हैं खोजी कुत्ते ?
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| मां कल्याणी मंदिर से आभूषण चोरी मामले में घटना के तीन दिन बाद श्वान के साथ जांच करते नगर थानाध्यक्ष नंदू शर्मा |
इसे संयोग कहें या कुछ और। चोरी के हर केस में पुलिस देर से पहुंचती है और इसके कुत्ते तो...? घटना के बाद जांच के लिए पुलिस से भी देर से पहुंचते हैं पुलिस के कुत्ते। यह वह इलाका है जहां चोरी व छिनतई के मामले मामूली माने जाते हैं। लिहाजा, इन मामलों में पुलिसिया जांच का अंदाज भी मामूली होता है। यदि चोरी की कुछ घटनाएं काफी तूल पकड़ ले और चोरों की गिरफ्तारी पुलिसिया कर्तव्य से आगे निकल उसकी प्रतिष्ठा का विषय बन जाए, तो जांच में पहले ही अपना सारा दिमाग खपा चुकी पुलिस अपने कुत्तों की ओर निहारती है। शायद, वह भी मानती है कि जो काम वह नहीं कर सकी, वह शायद उनके कुत्ते कर जाएं। खोजी कुत्तों का सहयोग घटनाओं के उद्भेदन में पुलिसिया अनुंसधान का एक अहम हिस्सा है, लेकिन क्या इस बात पर आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए कि ये कुत्ते घटना के घंटों या दिनों बाद क्यों पहुंचते हैं, जब उनके सूंघने के लिए शायद कुछ बचा ही नहीं होता है? सारण पुलिस की जांच का यह तरीका उसकी जांच और उसे, दोनों को ही आम आदमी की नजर में कठघरे में खड़ा कर रहा है। घटना के हफ्तेभर बाद किसी घटना में कुत्ते का सहयोग लेना जांच की खानापूरी नहीं तो जांच में विलंब तो अवश्य है। और, अनुसंधान का मूल मंत्र तो यही है कि पल-पल की देरी व लापरवाही साक्ष्य मिटाती है। क्या इस बात से सारण की पुलिस अनजान है? और यदि वह जानती है तो जानते हुए यह गलती क्यों?
मामला चाहे मांझी स्थित राम-जानकी मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण व सीता की अष्ठधातु की प्रतिमाओं की चोरी का हो, या फिर छपरा शहर के मध्य योगिनिया कोठी स्थित मां कल्याणी मंदिर से लाखों के आभूषणों की चोरी का हो। मांझी में लोगों के लगातार सड़क जाम, मंदिर के पुजारी की अनशन की धमकी व हफ्तेभर बाद भी कोई सुराग नहीं लगने से खतरे में पड़ी पुलिसिया प्रतिष्ठा को बचाने के लिए घटना के एक सप्ताह बाद कुत्ते की मदद पुलिस ने ली थी। जिसका नतीजा हुआ कि कुत्ता खेत-खलिहान दौड़ता रह गया और कुछ हासिल न हो सका। इधर, तीन दिन पूर्व योगिनिया कोठी स्थित मां कल्याणी मंदिर में आभूषण चोरी की घटना में भी कुत्ते को लेकर पुलिस आज रविवार को पहुंची। खोजी कुत्ता सिर्फ इधर-उधर टहल कर रह गया, कुछ ढूंढ नहीं पाया। घटना की जांच के लिए पुलिस जब खोजी कुत्ते को लेकर तब पहुंचती है जब घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों के पैरों के निशान बन चुके होते हैं। आखिर, कुत्ता किन पैरों के निशान व किसे सूंघकर आगे बढ़े? वह इधर-उधर ही घूमता रह जाता है और पुलिस लकीर पीटती रहती है।
ठंड का मौसम चोरों के लिए मुफीद माना जाता है। ऐसे में, इलाकों में असुरक्षा बढ़ जाती है और इसके साथ ही पुलिस की जिम्मेवारी भी। बहरहाल, जिले में चोरी की बढ़ती घटनाओं से एक तरफ जिलेवासी भयग्रस्त हैं तो दूसरी तरफ अपने ही अंदाज-ए-जांच में है पुलिस। देखना तो यह है कि पुलिस कब तक लोगों के दिलों में अपना भरोसा और अपराधियों के दिलों में खौफ भर पाती है?
मामला चाहे मांझी स्थित राम-जानकी मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण व सीता की अष्ठधातु की प्रतिमाओं की चोरी का हो, या फिर छपरा शहर के मध्य योगिनिया कोठी स्थित मां कल्याणी मंदिर से लाखों के आभूषणों की चोरी का हो। मांझी में लोगों के लगातार सड़क जाम, मंदिर के पुजारी की अनशन की धमकी व हफ्तेभर बाद भी कोई सुराग नहीं लगने से खतरे में पड़ी पुलिसिया प्रतिष्ठा को बचाने के लिए घटना के एक सप्ताह बाद कुत्ते की मदद पुलिस ने ली थी। जिसका नतीजा हुआ कि कुत्ता खेत-खलिहान दौड़ता रह गया और कुछ हासिल न हो सका। इधर, तीन दिन पूर्व योगिनिया कोठी स्थित मां कल्याणी मंदिर में आभूषण चोरी की घटना में भी कुत्ते को लेकर पुलिस आज रविवार को पहुंची। खोजी कुत्ता सिर्फ इधर-उधर टहल कर रह गया, कुछ ढूंढ नहीं पाया। घटना की जांच के लिए पुलिस जब खोजी कुत्ते को लेकर तब पहुंचती है जब घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों के पैरों के निशान बन चुके होते हैं। आखिर, कुत्ता किन पैरों के निशान व किसे सूंघकर आगे बढ़े? वह इधर-उधर ही घूमता रह जाता है और पुलिस लकीर पीटती रहती है।
ठंड का मौसम चोरों के लिए मुफीद माना जाता है। ऐसे में, इलाकों में असुरक्षा बढ़ जाती है और इसके साथ ही पुलिस की जिम्मेवारी भी। बहरहाल, जिले में चोरी की बढ़ती घटनाओं से एक तरफ जिलेवासी भयग्रस्त हैं तो दूसरी तरफ अपने ही अंदाज-ए-जांच में है पुलिस। देखना तो यह है कि पुलिस कब तक लोगों के दिलों में अपना भरोसा और अपराधियों के दिलों में खौफ भर पाती है?

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