नाम से ब्रम्हचारी, कार्य से कदाचारी...
![]() |
| गंगा सिंह कालेज में सीएलसी के लिए 60 रुपये की रिश्वत लेता रिश्वतखोर ब्रम्हचारी |
मामला गंगा सिंह महाविद्यालय का है। जहां कल दोपहर के 1.30 बजे हमें सीएलसी के लिए छात्रों से हो रही वसूली से सीधा साक्षात्कार हुआ। बगैर परिचय दिए खड़े होने के कारण ब्रम्हचारी हम पर ध्यान नहीं देते और वे अपनी फीस लेने में लगे होते हैं, इसी बीच हमारे साथ पहुंचे एक मित्र को उनकी करतूत की मोबाइल से तस्वीर लेने का मौका मिल जाता है। ब्रम्हचारीजी आवेदन अलमीरा में और 'फीस' पाकेट में रख, परीक्षा में वीक्षण की ड्यूटी करने चले जाते हैं और हम महाविद्यालय से हम बाहर निकलते हैं।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में अभी स्नातकोत्तर में नामांकन चल रहा है और स्नातक तृतीय वर्ष का परिणाम भी हाल ही में प्रकाशित हुआ है। लिहाजा, स्नातकोत्तर में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक महाविद्यालयों में विभिन्न जरूरी कागजातों के लिए पहुंच रहे हैं। मगर, इन कागजातों के लिए आवश्यक प्रमाणपत्रों की छायाप्रतियां व फीस दिए जाने के बाद भी उन्हें सीएलसी नहीं मिल रहा। प्रायः सभी महाविद्यालयों में एक 'ब्रम्हचारी' बैठा है जो अपने 'वसूलों' से कोई समझौता नहीं करता और वसूली को ही अपना धर्म मानता है।
इस संबंध में जब हमने गंगा सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डा. के.पी. श्रीवास्तव से बात की तो उनका बयान भी चौकाने वाला रहा। वे ऐसे कर्मियों से खुद बेसस नजर आए। कहा कि कर्मियों द्वारा छात्रों से अवैध वसूली की शिकायत कई बार मिली है। इस बाबत कर्मियों को कई बार डांट-फटकार भी लगाई गई है, लेकिन कर्मी अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे। इसकी शिकायत जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलसचिव से भी की जा चुकी है, लेकिन कर्मी सुधरने को तैयार नहीं। सीएलसी की फीस 100 रुपये ही है, यदि इससे अधिक कोई कर्मी लेता है तो यह गलत है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणियों का स्वागत है लेकिन फूहड़ शब्द निषेध हैं।