नाम से ब्रम्‍हचारी, कार्य से कदाचारी...


गंगा सिंह कालेज में सीएलसी के लिए 60 रुपये की रिश्‍वत लेता रिश्‍वतखोर ब्रम्‍हचारी
नाम और उम्र उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाती है। ब्रम्‍हमचारीजी की बढ़ती उम्र उन्हें वरीय नागरिक बनाने वाली है। कुछ-कुछ नत्थुलाल-सी उनकी मूंछे उनके व्यक्तित्व की शान बढ़ाती है, लेकिन जैसे ही वे अपना परिचय देते हैं, उनके नाम, उम्र, हाव-भाव से बना उनका व्यक्तित्व धराशायी हो जाता है और सामने आता है एक ऐसा शख्‍स, जो जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय के महाविद्यालयों में फैले भ्रष्टाचार का प्रतीक है। गोपालगंज जिले के सिधवलिया जैसे सुदूर क्षेत्र से अपना सीएलसी लेने के लिए पहुंचे स्नातक उत्‍तीर्ण छात्र वीरेन्द्र शर्मा को वे अपना परिचय देते हैं- 'कई साल से सीएलसी के काम देख तानी। ब्रम्‍हचारी के फीस शुरू से 60 रुपया बा। आजले केहु कुछु नइखे कहले।' बेहयाई की हद तक जाकर ब्रम्‍हचारीजी छात्र से अपनी फीस 60 रुपये बताते हैं और फिर रिश्‍वत लेने के बाद ही छात्र का आवेदन स्वीकार करते हैं। सीएलसी व रसीद बाद में देंगे और 120 रुपये लेकर छात्र को यह भी बता देते हैं कि रसीद सिर्फ सौ रुपये की ही मिलेगी।
मामला गंगा सिंह महाविद्यालय का है। जहां कल दोपहर के 1.30 बजे हमें सीएलसी के लिए छात्रों से हो रही वसूली से सीधा साक्षात्कार हुआ। बगैर परिचय दिए खड़े होने के कारण ब्रम्‍हचारी हम पर ध्यान नहीं देते और वे अपनी फीस लेने में लगे होते हैं, इसी बीच हमारे साथ पहुंचे एक मित्र को उनकी करतूत की मोबाइल से तस्‍वीर लेने का मौका मिल जाता है। ब्रम्‍हचारीजी आवेदन अलमीरा में और 'फीस' पाकेट में रख, परीक्षा में वीक्षण की ड्‌यूटी करने चले जाते हैं और हम महाविद्यालय से हम बाहर निकलते हैं।
 जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय, छपरा में अभी स्नातकोत्‍तर में नामांकन चल रहा है और स्नातक तृतीय वर्ष का परिणाम भी हाल ही में प्रकाशित हुआ है। लिहाजा, स्नातकोत्‍तर में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक महाविद्यालयों में विभिन्न जरूरी कागजातों के लिए पहुंच रहे हैं। मगर, इन कागजातों के लिए आवश्यक प्रमाणपत्रों की छायाप्रतियां व फीस दिए जाने के बाद भी उन्हें सीएलसी नहीं मिल रहा। प्रायः सभी महाविद्यालयों में एक 'ब्रम्‍हचारी' बैठा है जो अपने 'वसूलों' से कोई समझौता नहीं करता और वसूली को ही अपना धर्म मानता है।
 इस संबंध में जब हमने गंगा सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य  प्रो. डा. के.पी. श्रीवास्तव से बात की तो उनका बयान भी चौकाने वाला रहा। वे ऐसे कर्मियों से खुद बेसस नजर आए। कहा कि कर्मियों द्वारा छात्रों से अवैध वसूली की शिकायत कई बार मिली है। इस बाबत कर्मियों को कई बार डांट-फटकार भी लगाई गई है, लेकिन कर्मी अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे। इसकी शिकायत जयप्रकाश विश्‍वविद्यालय के कुलसचिव से भी की जा चुकी है, लेकिन कर्मी सुधरने को तैयार नहीं। सीएलसी की फीस 100 रुपये ही है, यदि इससे अधिक कोई कर्मी लेता है तो यह गलत है।

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