...और कितनी बार मरेंगे लालू
जी हां, हम राजद सुप्रीमो, पूर्व रेलमंत्री व छपरा के सांसद लालू प्रसाद की ही बात कर रहे हैं। अपने मरने की बात तो उन्होंने खुद की है। हम तो बस हो रही चर्चाओं को आपके सामने ला रहे हैं। मंच से श्री प्रसाद का खुला ऐलान है कि अगर महिला आरक्षण विधेयक यूं ही पास हो गया तो ऐसा उनकी लाश पर ही संभव होगा। बता दें कि उन्होंने झारखंड बंटवारे के समय भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था। लेकिन, बंटवारा तो हो गया। हां, लालू जी सही-सलामत रहे। अब उन्होंने दुबारा अपने मरने की बात कहकर एक बार फिर चर्चाओं को हवा दे डाली है। लोग चर्चा को मजबूर है- आखिर कितने बार मरेंगे लालू।
बताते चलें कि गत 14 मार्च को छपरा संसदीय क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में लालू प्रसाद की सभाएं हुईं। उत्साहित राजद कार्यकर्ताओं ने उनका भरपूर स्वागत किया। मशरक में तो एक कार्यकर्ताओं ने उन्हें स्वर्ण मुकुट भेंट किया। अभिनंदन से गदगद हुए लालू जब सभा को संबोधित करते उठे तो उन्होंने वह गलती दुहरा डाली जो उन्होंने झारखंड बंटवारे के समय की थी। गलती की, गलत बयानबाजी की। उन्होंने ऐसी बात कह डाली, कुछ ऐसा वादा कर डाला जो पूरा करने की वे सोच भी नहीं सकते, वैसे इसे पूरा भी नहीं किया जाना चाहिए। सू साइड किसी भी परिवेश, परिस्थिति में हो, अच्छी बात नहीं कही जा सकती। सू साइड की बात सुनकर चौंकिए मत। दरअसल लालू जी ने चारों सभाओं में जनसमूह को संबोधित करते हुए एलान किया कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ तो ऐसा उनकी लाश पर ही संभव होगा। अब इसे आत्महत्या की धमकी नहीं तो और क्या कहेंगे। लालू प्रसाद ने सभा में मंच से खुले रूप से कहा कि वे महिला आरक्षण विधेयक के विरोधी नहीं हैं लेकिन इसे यूं ही पारित नहीं किया जाना चाहिए। कोटा के अंदर कोटा की बात पर अड़े लालू ने जोश में यहां तक कह डाला कि उनकी बात नहीं मानने पर केन्द्र सरकार को उनकी लाश पर विधेयक पास करना होगा। खुले मंच से किसी गंभीर नेता का ऐसा वक्तव्य किसी को भी चौंका सकता है। लेकिन, यहां के लोग नहीं चौंके। वह इसलिए क्योंकि बात कितनी भी गंभीर व भयावह क्यों न हों, कई बार कही जाय तो आश्चर्य-हैरानी नहीं होती। जी हां, लालू जी भी ऐसा कोई पहली बार नहीं कह रहे थे, उन्होंने इसके पूर्व भी अपनी आत्महत्या या हत्या की धमकी दी थी। याद करें, कुछ वर्ष पहले की ही बात है। झारखंड बंटवारे के समय झारखंड मुक्ति मोर्चा बंटवारे के लिए सबकुछ करने को उतारू था और लालू जी बंटवारा नहीं होने देने के लिए काफी फिक्रमंद। जब उन्होंने देखा कि उनकी नहीं चल पा रही है और बंटवारा होकर ही रहेगा तो उन्होंने यह धमकी देनी शुरू की कि अगर झारखंड बना तो वह उनकी लाश पर बनेगा। लेकिन झारखंड तो बन गया, हां उसके नीचे-पीछे लालूजी की कब्र कहीं दिखाई नहीं देती। इस बार भी कुछ वैसी ही परिस्थितियां हैं। लालू प्रसाद महिला आरक्षण विधेयक में कोटा के भीतर कोटा चाहते हैं जबकि विधेयक यूं ही पास होता नजर आ रहा है। अधिक आसार है कि कोटा के अंदर कोटा की बात नहीं मानी जाये। ऐसे में लालू जी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। अब, जबकि केन्द्र सरकार उनकी बात नहीं मान रही तो वे सभाओं में घूम-घूमकर धमकी देते चल रहे हैं कि यदि विधेयक हुबहू पारित हुआ तो केन्द्र सरकार ऐसा उनकी लाश पर करेगी। परंतु, लालू प्रसाद शायद ही यह बता सकें कि मृत्यु लोक में बार-बार मरकर जीने का अमरत्व वाला यह वरदान उन्हें कहां से प्राप्त हुआ है। कोई आश्चर्य की बात नहीं कि आने वाले दिनों में उनकी कोई और जिद नहीं मानी जाये और वे धमकी दें कि यदि ऐसा हुआ तो उनकी लाश पर होगा...।
बताते चलें कि गत 14 मार्च को छपरा संसदीय क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में लालू प्रसाद की सभाएं हुईं। उत्साहित राजद कार्यकर्ताओं ने उनका भरपूर स्वागत किया। मशरक में तो एक कार्यकर्ताओं ने उन्हें स्वर्ण मुकुट भेंट किया। अभिनंदन से गदगद हुए लालू जब सभा को संबोधित करते उठे तो उन्होंने वह गलती दुहरा डाली जो उन्होंने झारखंड बंटवारे के समय की थी। गलती की, गलत बयानबाजी की। उन्होंने ऐसी बात कह डाली, कुछ ऐसा वादा कर डाला जो पूरा करने की वे सोच भी नहीं सकते, वैसे इसे पूरा भी नहीं किया जाना चाहिए। सू साइड किसी भी परिवेश, परिस्थिति में हो, अच्छी बात नहीं कही जा सकती। सू साइड की बात सुनकर चौंकिए मत। दरअसल लालू जी ने चारों सभाओं में जनसमूह को संबोधित करते हुए एलान किया कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ तो ऐसा उनकी लाश पर ही संभव होगा। अब इसे आत्महत्या की धमकी नहीं तो और क्या कहेंगे। लालू प्रसाद ने सभा में मंच से खुले रूप से कहा कि वे महिला आरक्षण विधेयक के विरोधी नहीं हैं लेकिन इसे यूं ही पारित नहीं किया जाना चाहिए। कोटा के अंदर कोटा की बात पर अड़े लालू ने जोश में यहां तक कह डाला कि उनकी बात नहीं मानने पर केन्द्र सरकार को उनकी लाश पर विधेयक पास करना होगा। खुले मंच से किसी गंभीर नेता का ऐसा वक्तव्य किसी को भी चौंका सकता है। लेकिन, यहां के लोग नहीं चौंके। वह इसलिए क्योंकि बात कितनी भी गंभीर व भयावह क्यों न हों, कई बार कही जाय तो आश्चर्य-हैरानी नहीं होती। जी हां, लालू जी भी ऐसा कोई पहली बार नहीं कह रहे थे, उन्होंने इसके पूर्व भी अपनी आत्महत्या या हत्या की धमकी दी थी। याद करें, कुछ वर्ष पहले की ही बात है। झारखंड बंटवारे के समय झारखंड मुक्ति मोर्चा बंटवारे के लिए सबकुछ करने को उतारू था और लालू जी बंटवारा नहीं होने देने के लिए काफी फिक्रमंद। जब उन्होंने देखा कि उनकी नहीं चल पा रही है और बंटवारा होकर ही रहेगा तो उन्होंने यह धमकी देनी शुरू की कि अगर झारखंड बना तो वह उनकी लाश पर बनेगा। लेकिन झारखंड तो बन गया, हां उसके नीचे-पीछे लालूजी की कब्र कहीं दिखाई नहीं देती। इस बार भी कुछ वैसी ही परिस्थितियां हैं। लालू प्रसाद महिला आरक्षण विधेयक में कोटा के भीतर कोटा चाहते हैं जबकि विधेयक यूं ही पास होता नजर आ रहा है। अधिक आसार है कि कोटा के अंदर कोटा की बात नहीं मानी जाये। ऐसे में लालू जी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। अब, जबकि केन्द्र सरकार उनकी बात नहीं मान रही तो वे सभाओं में घूम-घूमकर धमकी देते चल रहे हैं कि यदि विधेयक हुबहू पारित हुआ तो केन्द्र सरकार ऐसा उनकी लाश पर करेगी। परंतु, लालू प्रसाद शायद ही यह बता सकें कि मृत्यु लोक में बार-बार मरकर जीने का अमरत्व वाला यह वरदान उन्हें कहां से प्राप्त हुआ है। कोई आश्चर्य की बात नहीं कि आने वाले दिनों में उनकी कोई और जिद नहीं मानी जाये और वे धमकी दें कि यदि ऐसा हुआ तो उनकी लाश पर होगा...।
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